पंचायत और निकाय चुनाव में ओबीसी सीटों के निर्धारण के लिए राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग 31 दिसंबर तक राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग काे रिपोर्ट नहीं दे पाएगा। आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर काे खत्म होगा लेकिन ओबीसी सीटों के निर्धारण की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक आयोग का 50 प्रतिशत से अधिक का काम बाकी है। बहरहाल काेर्ट के दिशा निर्देशों के आधार पर निर्वाचन आयोग काे 15 अप्रैल तक चुनाव कराने हैं। ऐसे में अब दूसरा माैका हाेगा जब चुनाव संबंधित ओबीसी आयोग का कार्यकाल बढ़ेगा। इससे पूर्व में 21 अगस्त काे आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था। आयोग का कार्यकाल बढ़ाने के लिए से राज्य सरकार काे प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। ये तय माना जा रहा है कि एक महीना या इससे अधिक का समय आयोग काे औरमिल सकता है। 14635 पंचायतें, 450 पंचायत समिति, निकायों में आरक्षण तय हाेगा ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट पर ही 14635 ग्राम पंचायतों, 450 पंचायत समिति और 41 जिला परिषदों में ओबीसी आरक्षण के आधार पर वार्ड से लेकर सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख तय हाेंगे। वार्डों का प्रतिशत तय हाेगा। निकायों में भी आरक्षण इसी के आधार पर तय हाेगा। 3 जनवरी तक जनसंवाद, फिर सर्वे आदि की वर्किंग हाेगी ओेबीसी राजनैतिक प्रतिनिधित्व आयोग की ओर से 22 दिसंबर से 3 जनवरी तक विभिन्न जिलों में जिला स्तरीय जनसंवाद एवं परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन करेगा। आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश (सेनि.) मदनलाल भाटी 22 दिसंबर को जैसलमेर और फलोदी, 23 दिसंबर को बाड़मेर और बालोतरा, 24 दिसंबर को जालोर और सिरोही, 26 काे डीडवाना, 29 दिसंबर को गंगानगर और हनुमानगढ़, 30 दिसंबर को पाली में व्यस्त रहेंगे। आयोग के सदस्य प्रो. राजीव सक्सेना एवं मोहन मोरवाल संयुक्त रूप से 30 दिसंबर को अलवर-खैरथल, 2 जनवरी को झालावाड़, 3 जनवरी को बांरा-बूंदी में जनसंवाद कार्यक्रम व्यस्त रहेगा। इसके बाद सर्वे आदि का प्रोसेस पूरा काराया जाएगा। 7 महीने से चल रही है आयोग की वर्किंग
ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग का गठन 9 मई 2023 काे हुआ था और तीन माह के कार्यकाल की समय सीमा निर्धारित की गई थी। ऐसे में समय पर रिपोर्ट तैयार नहीं हाेने पर 21 अगस्त काे कार्यकाल 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया था। आयोग की वर्किंग काे सात महीने गुजरने के बाद अब दाेबारा से आयोग का कार्यकाल बढने जा रहा है।
