बांसवाड़ा| किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उद्देश्य से चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बताया कि 14 वर्ष की आयु पूरी कर 15वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान वैक्सीन की उपयोगिता, लक्ष्य समूह की पहचान, टीकाकरण की प्रक्रिया, सुरक्षा मानक एवं संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। सीएमएचओ डॉ. खुशपालसिंह राठौड़ ने चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में पात्र बालिकाओं की पहचान कर समयबद्ध और सुरक्षित रूप से टीकाकरण सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सके। आरसीएचओ डॉ. दिनेश कुमार भाबोर ने बताया कि प्रशिक्षण में 28 मेडिकल ऑफिसर ने भाग लिया। एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षात्मक टीका है, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से होने वाले संक्रमण से बचाव करता है। एचपीवी एक ऐसा वायरस है जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) सहित कुछ अन्य कैंसर और बीमारियों का कारण बन सकता है। यह टीका मुख्य रूप से किशोरियों को लगाया जाता है। यह टीका एचपीवी के खतरनाक प्रकारों से सुरक्षा देता है, जो कैंसर का कारण बनते हैं। टीकाकरण संक्रमण होने से पहले अधिक प्रभावी होता है, इसलिए कम उम्र में लगाया जाता है।