सरकार के दो साल पूरे होने पर एक तरफ सत्ता पक्ष जश्न मना रहा है और दूसरी ओर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ हमला बोला। पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने कहा कि सीएम अनुभवहीन हैं। पर्ची से सीएम बनना आसान है, मगर सरकार चलाना मजाक नहीं है। इसलिए ब्यूरोक्रेसी इसका पूरा फायदा उठा रही है। ब्यूरोक्रेसी ही सरकार को फेल करने में लगी है। उन्होंने उदाहरण दिए कि बीकानेर में ऐसे कई प्रोजेक्ट हैं, जो सिर्फ ब्यूरोक्रेसी के कारण फेल हो रहे हैं। दरअसल शहर कांग्रेस की ओर से सरकार के दो साल के कामों का लेखा-जोखा लेकर पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, बीकानेर पूर्व के प्रत्याशी यशपाल गहलोत और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल मीडिया के सामने आए। लोकसभा उम्मीदवार गोविंद भी इसमें पहुंचे। गोविंद ने सरकार का बारीकी से पोस्टमार्टम किया और कहा कि राज्य चलाने के लिए अनुभव जरूरी है। अगर सीएम एक बार भी मंत्री रहे होते तो प्रदेश के इतने बुरे हाल नहीं होते। उन्हें सत्ता का अनुभव ही नहीं है, इसलिए अधिकारियों की मौज है। पूरी सरकार को ब्यूरोक्रेसी चला रही है। उसी का परिणाम है कि कुछ दिन पहले चीफ सेक्रेट्री और सीएम के प्रमुख सचिव तक बदल दिए गए। बीकानेर में 59 करोड़ का ड्रेनेज प्रोजेक्ट हो या म्यूजियम सर्किल से बीछवाल सिक्स लेन, लालगढ़ ओवरब्रिज हो या आयुर्वेद कॉलेज का अटका मामला—ये सब ब्यूरोक्रेसी के कारण ही अटके हैं। वरना मजाल है कि जो घोषणा सीएम कर दें, उसे इतना लंबा अटकाया जाए। क्योंकि सीएम को अनुभव नहीं है। गोविंद ने सीधे आरोप लगाया कि सोलर में खेजड़ी की कटाई हो रही है और उसे रोकने के लिए जुर्माना 100 से बढ़ाकर सिर्फ 1000 किया गया। ऐसे में खेजड़ी की कटाई नहीं रुकेगी, क्योंकि सोलर कंपनी से एक नहीं, कई भाजपा नेताओं की सांठगांठ है। जनता ये बात समझ रही है। इसलिए बिश्नोई समाज को भी सोचना चाहिए कि सत्ता के लोग ही पैसे कमाकर खेजड़ियों की कटाई पर मौन हैं। पूर्व की विधायक सदन नहीं जाती, पश्चिम वाले सिर्फ मुझे जिंदा रखते हैं पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने तंज कसते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल में मैं मंत्री था। पूरे पांच साल मैंने सिद्धि कुमारी को सदन में नहीं देखा। इस बार भी नहीं जा रहीं। मुझे समझ नहीं आता कि जनता ने जिसे चुना, वह जनता की बात सदन में नहीं उठाती। पश्चिम विधायक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे सदन में सिर्फ मुझे ही जिंदा रखते हैं। मेरे सिवाय उनके पास जनहित की बात उठाने की सोच नहीं है। वरना शहर में सड़कों पर चेचक सी निकल आई है। सीवरेज ने बुरा हाल कर दिया है। अस्पतालों के हाल सब जानते हैं। आखिर गंभीर सोच के साथ विधायक अपनी सरकार के सामने बात क्यों नहीं रखते। इस मौके पर जियाउर रहमान आरिफ और जावेद पड़िहार मौजूद थे। डॉ. बी.डी. कल्ला और यशपाल गहलोत की चार्जशीट विपक्ष कमजोर इसलिए ब्यूरोक्रेसी हावी प्रशासन पर दबाव बनाए रखने के लिए पक्ष के साथ विपक्ष की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है, मगर विपक्ष सड़क, सीवरेज, बिजली और पानी को लेकर कभी बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं कर पाया। सत्ता पक्ष ने इसका फायदा उठाया। जनसैलाब विपक्ष नहीं दिखा पाया। भाजपा ने कई बार बीकानेर में ही कांग्रेस सरकार को झुकाया है।