जयपुर | प्रदेश में पहली बार ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पॉलिसी लागू की गई है। नगरीय विकास विभाग ने सभी शहरों में इसे लागू करने के आदेश दिए हैं। शहरों में भीड़ भाड़ वाले इलाकों के लिए टीओडी पहली बार लागू की गई है। इसे न्यूयार्क की तर्ज पर लागू किया जाएगा। इस पॉलिसी में शहरी निकायों के वे इलाके शामिल करने होंगे, जिन के आस पास मेट्रो, रेल या बस या ट्रेन के बड़े स्टेशन हैं। उन स्टेशनों के आसपास ही घर, दफ्तर, दुकानें और जरूरी सुविधाएं टीओडी के तहत ऐसे विकसित की जाएंगी कि लोगों को कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए टीओडी नीति लाई जा रही है, जिसको कैबिनेट की सर्कुलर के जरिए मंजूरी के बाद विभाग ने इसे लागू करने के आदेश दिए हैं। अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत टीओडी जोन में एक हेक्टेयर या अधिक बड़े क्षेत्र की योजनाएं डवलप होगी। इस क्षेत्र का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सघन विकसित क्षेत्र में शामिल होगा। भास्कर ने लिखा था- अब बनेंगे टीओडी जोन भास्कर ने 14 सितंबर को ‘टाउनशिप और टीडीआर पॉलिसी अधर में लटकी, अब टीओडी जोन बनाएंगे, कार नहीं ले जा सकेंगे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। उसके बाद विभाग ने पॉलिसी को फाइनल रूप दिया। अब इसे लागू किया गया है। भास्कर ने लिखा था 1.5 करोड़ आबादी के लिए तीन आईएएस अफसर लाए 3-3 पालिसी शीर्षक से खबर में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। 800 मीटर के दायरे में टीओडी जोन बनेंगे टीओडी नीति में मेट्रो, रेल, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम व अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े इलाकों को शामिल किया जाएगा। ये ऐसे इलाके होंगे, जिनमें एक ही दिशा में प्रति घंटा 5 हजार या उससे अधिक लोग यात्रा करते हों। ऐसे सभी स्टेशनों को टीओडी नोड घोषित किया जाएगा और इन नोड के 800 मीटर दायरे को टीओडी जोन माना जाएगा। एक हेक्टेयर से कम भूमि पर केवल उन्हीं योजनाओं को स्वीकृति मिलेगी, जो पूरी तरह इंटेंस डेवलपमेंट एरिया (ट्रांजिट स्टेशन से 500 मीटर या ट्रांजिट लाइन से 500-800 मीटर दायरे) में हो।
