शहर में दो महीने पहले खत्म हुई भीख मंगवाने वाले बच्चों की समस्या फिर पूरी तरह लौट आई है। शहर के लगभग हर चौक पर छोटे-छोटे बच्चे और अपाहिज व्यक्ति वाहनों के बीच दौड़ते, शीशे खटखटाते और भीख मांगते दिख रहे हैं। ट्रैफिक में फंसकर इनके घायल होने का खतरा बढ़ गया है। दुगरी, मॉडल टाउन, फुल्लांवाल और पार्क प्लाजा के आसपास हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। लगातार बढ़ती परेशानी से तंग आकर कई लोगों ने मिलकर जिला बाल सुरक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी है। विभाग ने माना है कि फोर्स की कमी के कारण पिछले दो महीनों से कोई एक्शन नहीं हो सका। अब बाल सुरक्षा विभाग ने सोमवार से सभी प्रमुख चौकों पर छापेमारी कर बच्चों को सड़क से हटाने, काउंसलिंग कराने और उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिल कराने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। शहर में ट्रैफिक लाइट पर बच्चों की भीड़ फिर खतरनाक तरीके से बढ़ने लगी है। दो महीने पहले बाल सुरक्षा विभाग ने बड़े अभियान में सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों को सुधार केंद्र भेजा था। इसके बाद हालात सुधरे थे। लेकिन विभाग की पकड़ ढीली पड़ते ही बच्चों और अपाहिज व्यक्तियों की मौजूदगी फिर उसी तरह बढ़ गई है। हर चौक पर बच्चे वाहनों के बीच दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। कई बार वे गाड़ियों के बहुत करीब आ जाते हैं। इससे बड़े हादसों की आशंका बढ़ जाती है। जब इस बढ़ती समस्या पर जिला बाल सुरक्षा अधिकारी रश्मी से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि फोर्स की कमी के कारण पिछले दो महीनों में कोई अभियान नहीं चल पाया। इसी वजह से सड़कों पर भिक्षावृत्ति दोबारा बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि शिकायतें लगातार मिल रही हैं। विभाग ने अब तैयारी पूरी कर ली है। रश्मी ने बताया कि सोमवार से शहर के सभी प्रमुख चौकों पर छापेमारी शुरू की जाएगी। सड़क पर भीख मांगते मिले बच्चों को तुरंत हटाया जाएगा। इसके बाद उनकी काउंसलिंग करवाई जाएगी। बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती कराने की प्रक्रिया शुरू होगी, ताकि उन्हें सुरक्षित माहौल मिल सके और वे शिक्षा से जुड़ सकें। शहरवासियों का कहना है कि यह केवल ट्रैफिक और सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। प्रशासन की सख्ती ही इन मासूमों को सड़क से स्कूल तक ले जा सकती है। शहर को उम्मीद है कि इस बार अभियान आधे-अधूरे न रहकर स्थायी समाधान देगा। दुगरी निवासी स्वर्णजीत सिंह ने शिकायत में बताया कि दुगरी और मॉडल टाउन चौक पर छोटे अपाहिज बच्चे हर दिन गाड़ियों के बीच फंसे नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार ग्रीन सिग्नल लगते ही जब वाहन तेजी से चलते हैं, तब बच्चे अचानक सामने आ जाते हैं। ऐसे में टक्कर होते-होते बच जाती है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक में बच्चों की मौजूदगी से रोज हादसों का डर बना रहता है। रोज पक्खोवाल रोड से गुजरने वाली पल्लवी कहती हैं कि फुल्लांवाल चौक से पार्क प्लाजा चौक तक भिखारियों की संख्या बहुत बढ़ गई है। कई लोग शीशे पर जोर-जोर से हाथ मारते हैं। इससे महिलाएं और बुजुर्ग घबरा जाते हैं। कई बार लोग डर के कारण शीशा ऊपर भी नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लगातार बिगड़ रही है और प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी है।
