विक्की कुमार | अमृतसर पहलगाम आतंकी हमले के बाद जहां घाटी के लोग दहशत और असुरक्षा के माहौल से जूझ रहे हैं, वहीं पंजाब में व्यापारियों को मिल रहे सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल ने उन्हें नई उम्मीद दी है। इसका सीधा असर इस साल पाईटेक्स में देखने को मिला। इस बार पाईटेक्स में जम्मू-कश्मीर से करीब 34 व्यापारी स्टॉल लगाने पहुंचे हैं जिनमें 12 महिलाएं हैं जबकि बीते साल 20 कारोबारी पहुंचे थे। पाईटेक्स में पहले दिन वीरवार को करीब 50 लोग पहुंचे। मेला 8 दिसंबर तक चलेगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी कश्मीरी उत्पाद पाईटेक्स में लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। गर्म स्टॉल, ऊनी जैकेट, फर वाली कैपें, हाथों से कढ़ाई वाले कोट, पश्मीना वूल इनकी डिमांड पहले ही दिन से लगातार बनी हुई है। गुणवत्ता और कश्मीरी कला का आकर्षण ऐसा है कि कई स्टॉल्स पर भीड़ पूरे दिन लगी रही। उम्मीद है कि कश्मीरी कारोबारियों को इस वर्ष पिछले सभी वर्षों की तुलना में अधिक व्यापार मिलेगा। कश्मीर से पहुंचे कारोबारियों में इस बार लगभग 12 महिलाएं भी शामिल हैं, जो अपने हस्तनिर्मित ऊनी उत्पाद, कश्मीरी एम्ब्रॉयडरी की विशेष डिजाइन वाली शॉल, क्रूएल वर्क, पश्मीना और सर्दियों के फैशन से जुड़े अन्य उत्पाद लेकर आई हैं। महिला उद्यमियों के अनुसार पंजाब का वातावरण न केवल व्यापार के लिए सुरक्षित है, बल्कि यहां के लोग कश्मीरी उत्पादों की गुणवत्ता और कला को विशेष रूप से महत्व देते हैं। एक महिला कारीगर ने बताया कि कश्मीर में हालात हमेशा अनिश्चित रहते हैं, लेकिन पंजाब में मेले के दौरान हमें जिस तरह का सम्मान और सुरक्षा मिलती है, वह हमें हर साल यहां आने के लिए प्रेरित करता है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीर के व्यापारी असुरक्षा और अनिश्चितता के हालातों से तनाव में हैं। कई व्यापारियों ने बताया कि घाटी में लगातार बदलते माहौल से व्यापार प्रभावित होता है, लेकिन पंजाब जैसे राज्यों में उन्हें स्थिरता और सुरक्षा मिलती है। इस कारण इस वर्ष पाईटेक्स में भाग लेने वाले कश्मीरी व्यापारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। आयोजकों के मुताबिक कश्मीरी व्यापारियों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि पाईटेक्स अब देश के सबसे विश्वसनीय और सुरक्षित व्यापारिक आयोजनों में से एक बन चुका है।