पंजाब के अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ की सिंडिकेट और सीनेट को केंद्र सरकार द्वारा खत्म किए जाने के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे पंजाब के साथ एक और नाइंसाफी करार दिया। एडवोकेट धामी ने कहा कि यह कदम केंद्र सरकार द्वारा पंजाब की इस प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्था पर और सूबे के अधिकारों पर नियंत्रण स्थापित करने की स्पष्ट साजिश है। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय की यह खासियत थी कि इसकी सीनेट और सिंडिकेट का गठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होता था, लेकिन केंद्र सरकार अब इसे पूरी तरह अपने अधीन करना चाहती है। पंजाब के लोगों में अलगाव और बेगानगी की भावना उन्होंने इस फैसले को तानाशाहीपूर्ण और संघीय ढांचे तथा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की खुली उल्लंघना बताया। धामी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के अधिकारों के खिलाफ लिए जा रहे ऐसे एकतरफा फैसले, पंजाब के लोगों में अलगाव और बेगानगी की भावना पैदा कर रहे हैं। पंजाब सरकार पर भी सवाल धामी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर भी सवाल उठाया कि उसने पंजाब के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि चाहे मामला राजधानी चंडीगढ़ का हो, दरियाई पानी के बंटवारे का या भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड का केंद्र सरकार हमेशा पंजाब के साथ भेदभाव करती आई है। ऐसे में पंजाब सरकार का ढुलमुल रवैया भी सूबे के हितों के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
