केंद्र सरकार ने 59 साल पुरानी सीनेट और सिंडिकेट को भंग करने का नोटिफिकेशन जारी किया है। जिस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया आ रही हैं। पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल चीमा समेत, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और कांग्रेस महासचिव प्रगट सिंह ने इसे पंजाब और पंजाबियत को खत्म करने के प्रयास जैसा बताया है। सभी ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के इस नोटिफिकेशन को रद्द करने के लिए हर तरह का संघर्ष करने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से सीनेट सदस्यों की संख्या ही कम नहीं की है बल्कि इनकी शक्तियां भी कम कर दी हैं। सिलसिलेवार पढ़ें क्या है पूरा मामला… नई प्रणाली के गठन से क्या होगा… यह है नया सिंडिकेट ढांचा पंजाब कैबिनेट हरपाल चीमा ने क्या कहा… पूर्व शिक्षा मंत्री प्रगट सिंह का केंद्र पर कटाक्ष केंद्र सरकार एजुकेशन सिस्टम पर कंट्रोल करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी में होने वाले एक सेमीनार पर भी कितने सवाल खड़े कर दिए गए थे। स्टूडेंट्स से भी दाखिला फॉर्म में शर्तों पर साइन करवाए जा रहे हैं कि वह वहां कोई भी एक्टिविटी नहीं कर सकेंगे और कोई धरना नहीं लगा सकेंगे। यह उनके अधिकारों का हनन है। केंद्र ने पंजाब से यह अधिकार छीन लिया है।
इससे सात जिलों के एफिलिएटि कालेजों, तीन रीजनल कैंपसों समेत डीपीआई कॉलेज पूरी तरह प्रभावित होंगे। उनको दरकिनार करके प्रक्रिया बना दी है, जो बिल्कुल सरकारी हो। आरएसएस इस सिस्टम को ड्राइव कर रही है। स्टाफ आरएसएस बैकग्राउंड से लगाया जा रहा है। तभी उनका कब्जा एजुकेशन सिस्टम पर रहे। उनका हर हमला पंजाब के समस्त ढांचे को कमजोर करने की साजिश है।
शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल का भी केंद्र पर हमला
सुखबीर बादल ने भी पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट को भंग करने और उसमें पंजाब की भागीदारी समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह देश के संघीय ढांचे का अपमान और पंजाब के शैक्षिक व बौद्धिक ढांचे पर हमला है। वह भी ‘पंजाब दिवस’ के अवसर पर, जिसकी स्थापना के लिए हजारों पंजाबियों ने कुर्बानियां दीं। केंद्र सरकार ने पंजाब की परवाह किए बिना और पंजाब की गौरवशाली विरासत से पंजाब को बेदखल करके यह एकतरफा अध्यादेश जारी करके पंजाब को एक और असहनीय जख्म दिया है।
