साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को लेकर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने मामले में पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में विस्तृत जांच करें। कोर्ट ने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामले में असली किंगपिन को पकड़ना जरूरी हैं। इस पर कोर्ट में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मामलों में हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। ये आरोपी विदेशों में बैठकर ठगी को अंजाम देते है। इनके आईपी एड्रेस भी देश के बाहर के होते है लेकिन हम तकनीक के आधार पर असली गुनहगार को पकड़ने की कोशिश करते हैं। आज सुनवाई के दौरान डीजीपी राजीव शर्मा वीसी और जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल, साइबर क्राइम डीआईजी, एसपी सहित अन्य अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे। कोर्ट ने पूछा-जमानत में क्या शर्तें लगाई जाए
मामले में न्यायमित्र आदर्श सिंघल ने बताया- आज कोर्ट ने डीजीपी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों और सभी पक्ष के वकीलों से पूछा है कि इस तरह के आरोप में शामिल आरोपियों को जमानत देते समय किस-किस तरह की शर्तें लगाई जानी चाहिए, जिससे आरोपी फिर से अपराध नहीं करें। उन्होंने कोर्ट को बताया- साइबर फ्रॉड के मामलों में असली किंगपिन ठगी के लिए नौजवान लड़कों का इस्तेमाल करते है। कई बार तो इन युवाओं को इसके बारे में पता भी नहीं होता है कि वह ठगी के अपराध में शामिल हो गए है। पुलिस की ओर से पकड़े गए आरोपी के पीछे पूरी सिंडिकेट काम करती है, जिसका पकड़ा जाना जरूरी है लेकिन पुलिस की इंवेस्टिेगेशन वहां तक नहीं पहुंच पाती हैं। पुलिस सोमवार को व्हाइट पेपर पेश करेगी
कोर्ट में आज डीजीपी राजीव शर्मा और पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने साइबर फ्रॉड की प्रभावी रोकथाम और बेल में रिफोर्मेटिव कंडीशन को लेकर सोमवार तक व्हाइट पेपर पेश करने के समय मांगा। इस पर अदालत ने सभी जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 6 नवम्बर को तय की हैं।
