अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की सप्लाई का मामला सामने आया है। जेल से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किया गया। उस नंबर से कनेक्ट बैंक अकाउंट में 50 लाख रुपए का लेन-देन हुआ। कैदी की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने जांच की, जिसमें मामला उजागर हुआ है। मामले में जेल प्रहरी महिपाल मंगलोदा की रिपोर्ट पर 19 अगस्त को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की गई है। FIR में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज पर आरोप है। ये सभी पहले सेंट्रल जेल में बंद थे। फिलहाल जमानत पर बाहर आए हुए हैं। जेल में हत्या के दो मामले में बंद भीकाराम ने 22 जुलाई 2025 को पीआईसीएस (जेल एसटीडी) से डीजी जेल को शिकायत भेजी थी। बंदी ने आरोप लगाया था कि उसके साथ विचाराधीन बंदी करण सिंह और कमल सिंह ने मारपीट की। दोनों ने नशे की एक गोली करीब 500 रुपए में बेचने और रुपए मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन डलवाने की बात कही। बंदी ने आरोप लगाया था कि विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। जेल प्रशासन की जांच में खुला मामला जांच में जेल एसटीडी से एक नंबर पर 1283 कॉल बंदी की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने अपने स्तर पर जांच की। जांच में सामने आया कि जेल से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किया गया था। एक दिन में 3 से लेकर 29 बार तक कॉल किया गया। यह मोबाइल नंबर श्रीनगर थाना क्षेत्र के कनाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम है। जांच के दौरान इस नंबर से जुड़े बैंक खाते का स्टेटमेंट भी खंगाला गया। 1 जनवरी 2024 से 20 अप्रैल 2026 के बीच खाते में कुल करीब 49 लाख 79 हजार 967 रुपए क्रेडिट होने की बात सामने आई। खास बात ये रही कि खाते में क्लोजिंग बैलेंस सिर्फ 13,358 रुपए बताया गया। जांच में जयराम रावत के चचेरे भाई शिवराज सिंह का भी नाम सामने आया। उसने पूछताछ में बताया कि वह कभी-कभी जेल में बंद अन्य कैदियों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता था। इसके बाद बंदियों के परिजन ऑनलाइन रुपए भेजते थे। जयराम रावत का मोबाइल नंबर तीन बैंक खातों से जुड़ा था। जेल से 50 लाख रुपए का लेन-देन जेल में कैदियों का एक एसटीडी अकाउंट (कैंटीन) होता है। एक बंदी को इसके लिए हर महीने करीब 3500 रुपए मिलते हैं। यदि 15 बंदियों के लिए भी अधिकतम सीमा के अनुसार रुपए खर्च किए जाए तो सालाना राशि करीब 6.30 लाख रुपए होता है। जयराम रावत के खाते में जेल से करीब 50 लाख रुपए का लेन-देन सामने आया। ऐसे में जेल में बंद कैदियों की ओर से रावत से रुपए का लेन-देन सामने आया। जेलकर्मियों की मिलीभगत की आशंका, जांच शुरू जांच रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि बंदियों के परिजनों के बजाय एक ही मोबाइल नंबर पर लगातार कॉल किए जाने के पीछे जेल के किसी कर्मचारी की मिलीभगत भी हो सकती है। इस नंबर को जेल के एसटीडी से जोड़ने में किसकी भूमिका रही और इससे संबंधित व्यक्ति को क्या लाभ मिला। इसकी जांच होगी।
