लेबर कोर्ट ने प्रदेश के दो IAS अधिकारियों का वेतन (सैलरी) रोकने का आदेश दिया है। लेबर कोर्ट ने अपने आदेश में रोडवेज के रिटायर्ड कंडक्टर के बकाया भुगतान पर पर दोनों अधिकारियों से 6 प्रतिशत ब्याज की वसूली करने के लिए कहा है। जज दिनेश गुप्ता ने कहा- जब तक तत्कालीन रोडवेज सीएमडी संदीप वर्मा और वर्तमान एमडी पुरुषोत्तम शर्मा ब्याज की राशि जमा नहीं करा देते हैं, तब तक उनका वेतन रिलीज नहीं किया जाए। साथ ही कोर्ट ने IAS संदीप वर्मा पर श्रम कानूनों की अवेहलना करने के मामले में FIR दर्ज करने का भी आदेश दिया। मामले की पालना रिपोर्ट के लिए 1 सितंबर को फिर सुनवाई रखी गई है। अवमानना कार्रवाई करने के निर्देश कोर्ट ने आदेश की कॉपी केंद्रीय डीओपीटी विभाग को भेजकर IAS संदीप वर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए भी कहा है। वहीं हाईकोर्ट को रेफरेंस भेजकर दोनों अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि किसी श्रमिक से निर्धारित मजदूरी का भुगतान किए बिना ओवरटाइम काम कराना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बेगार और जबरन श्रम के समान है। कंडक्टर को नहीं दिया था ओवरटाइम का भुगतान दरअसल, रोडवेज के एक कंडक्टर सीताराम ने साल 1996 से 2013 के बीच घोषित साप्ताहिक अवकाश (वीकली ऑफ) के दिनों में किए गए 124 दिनों के काम के लिए बकाया दोगुने ओवरटाइम भुगतान की मांग की थी। इस पर लेबर कोर्ट ने 30 जून 2026 को आदेश से मूल राशि 1 लाख 9 हजार 740 रुपए ब्याज और मुकदमे के खर्च सहित तय की गई थी। RASTC (राजस्थान रोडवेज) ने कंडक्टर को केवल 13 हजार 76 रुपए का आंशिक भुगतान किया। इस पर अब कोर्ट ने जयपुर कलेक्टर को निर्देश दिया कि वह शेष मूल राशि 96 हजार 664 रुपए पर 18% वार्षिक ब्याज और 25 हजार रुपए मुकदमे का खर्च, 3 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति राशि को RSRTC से भू-राजस्व के बकाया की तरह वसूल करें। इसमें से 6 प्रतिशत ब्याज की राशि दोनों अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। संदीप वर्मा के सर्कुलर को माना गलत दरअसल, जब संदीप वर्मा रोडवेज में सीएमडी रहे थे, उस समय उन्होंने 2 सर्कुलर जारी करके भुगतान की प्राथमिकता तय की थी। कोर्ट ने उन्हीं सर्कुलरों को श्रम कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ माना। हालांकि अपने स्पष्टीकरण में संदीप वर्मा ने कहा- यह सर्कुलर मैंने पूर्व के सीएमडी और हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों के तहत ही जारी किए थे। ऐसे में कर्मचारी के भुगतान में देरी के लिए मुझे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन कोर्ट ने उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया। वहीं वर्तमान रोडवेज एमडी पुरुषोत्तम शर्मा को कोर्ट ने आदेश के बाद भी भुगतान नहीं करने का दोषी माना। इसलिए कोर्ट ने दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए हाईकोर्ट को लिखा है।
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