भीलवाड़ा की तरह भरतपुर में भी नवजात झाड़ियों में मिला। दो दिन के मासूम का मुंह कपड़े से बंधा था, ताकि रोने की आवाज सुनाई न पड़े। नवजात के हाथ-पैर जगह-जगह से जंगली जानवरों ने नोच लिए थे। पैरों से खून बह रहा था। गुरुवार दोपहर में लकड़ी काटने गई महिलाओं ने बच्चे को देखा। महिलाओं ने तुरंत ग्रामीणों को बताया। गांव के लोग नवजात को जनाना हॉस्पिटल की NICU में भर्ती करवाया। डॉक्टरों का कहना है कि मासूम की हालत गंभीर है। मामला भरतपुर के सेवर थाना इलाके के झीलरा गांव का है। नगला झीलरा निवासी भीम सिंह ने बताया कि गांव के मोड़ पर कांटों वाली झाड़ियां हैं। गांव की कुछ महिलाएं लकड़ी काटने गई थी। इस दौरान उन्हें झाड़ियों से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। महिलाओं ने इसकी सूचना गांव में दी। इसके बाद हम लोग बच्चे के पास पहुंचे। नवजात को तुरंत सेवर अस्पताल लेकर गए। जहां से उसको भरतपुर के जनाना अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। शरीर पर जगह-जगह जानवरों के काटने के निशान डॉक्टर हिमांशु ने बताया- आज दोपहर करीब 12 बजे 2 व्यक्ति एक नवजात को जनाना अस्पताल लेकर आए। बच्चे को देखकर लग रहा है की पिछले 1 या 2 दिन के अंदर ही जन्म हुआ है। नवजात की हालत गंभीर है। उसके पैरों से ब्लडिंग हो रही है, लग रहा है कि किसी जानवर से उस पर हमला किया है। नवजात के हाथ-पैर पर जानवर के काटने के निशान हैं। NICU वार्ड में बच्चे का इलाज किया जा रहा है। झीलरा गांव की झाड़ियों में मिला था नवजात बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजा राम भुतौली ने बताया- जनाना अस्पताल से हमें फोन आया था कि यहां गंभीर हालत में एक नवजात भर्ती हुआ है। इसके बाद शिशु गृह की टीम, बाल कल्याण समिति और चाइल्ड हेल्प लाइन का स्टाफ जनाना अस्पताल पहुंचा। उसके शरीर को जगह-जगह से जंगली जानवरों ने काट लिया है। नवजात की हालत गंभीर है। ये खबर भी पढ़ें… मुंह में पत्थर ठूंसकर बच्चे को जंगल में फेंका, VIDEO:रोने की आवाज नहीं आए, इसलिए फेवीक्विक लगाया; जलाने के भी निशान मिले
भीलवाड़ा में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई थी। 15 दिन के मासूम को जंगल में फेंक दिया था। रोने की आवाज न आए, इसलिए उसके मुंह में पत्थर ठूंसकर फेवीक्विक से चिपका दिया था। मवेशी चराने वाले की नजर बच्चे पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए थे। पूरी खबर पढ़ें…
