जैसलमेर हादसे में वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह चौहान (50) की भी जान चली गई। वे अपने दोस्त जैसलमेर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटिया के साथ पोकरण जा रहे थे। जहां दोनों को पोकरण में एक मेडिकल की दुकान के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होना था।
हादसे में राजेंद्र सिंह की मौत हो गई, वहीं उनके दोस्त मनोज भाटिया गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका जोधपुर में इलाज जारी है। परिचितों ने बताया- जिस बस में हादसा हुआ वह एयरफोर्स चौराहे से आगे निकल गई थी, जिसके बाद उन्होंने ड्राइवर को फोन किया और बस को रेलवे स्टेशन पर रुकवाकर वहां से बस में सवार हुए। कुछ देर बाद ही यह दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें चौहान की मौके पर ही मौत हो गई। वे मरू लहर अखबार में लंबे समय से काम कर रहे थे। सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर परिचितों ने बताया- राजेंद्र सिंह चौहान सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं भव्यजीत सिंह की उम्र 17 वर्ष और हृदयांश की 12 वर्ष है। दोनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उनके पिता बालकिशन सिंह चौहान का पहले ही निधन हो चुका था, और कुछ साल बाद मां का भी देहांत हो गया। फुटबॉल-बास्केटबॉल के खिलाड़ी थे पत्रकारिता के साथ-साथ राजेंद्र सिंह चौहान फुटबॉल और बास्केटबॉल के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। खेल भावना और सरल स्वभाव के चलते वे हर वर्ग में लोकप्रिय थे। उनके भाई महेंद्र सिंह चौहान मेडिकल व्यवसाय से जुड़े हैं और राजेंद्र सिंह भी समय-समय पर दुकान के कामकाज में मदद करते थे। उनके एक अन्य भाई देवी सिंह चौहान पूर्व पार्षद हैं। 2 पॉइंट में समझिए हादसा चश्मदीद ने बताया क्या थे मौके के हालात मौके पर सबसे पहले पहुंचने वाले शराब ठेकेदार कस्तूर सिंह ने बताया- यहां पास ही में मेरा शराब का ठेका है। जैसे ही बस में आग लगी, मैं अपने साथियों को लेकर बस की तरफ दौड़ा। बस में इतनी तेज आग लगी थी कि हम पास भी नहीं जा पा रहे थे। हम कुछ नहीं कर पा रहे थे। इतने में एक लोकल ठेकेदार के पानी का टैंकर दिखाई दिया। वह आर्मी एरिया से आ रहा था। उसे आर्मी कैंट एरिया का ताला तोड़कर बाहर निकाला और बस की तरफ लेकर साथ-साथ दौड़े। इसके बाद भी बचाव नहीं कर पाए। मिलिट्री JCB लेकर आई शराब ठेकेदार कस्तूर सिंह ने बताया- इसके बाद मिलिट्री को किसी ने सूचना दी तो यहां मिलिट्री JCB लेकर आई। आर्मी ने JCB से बस का ताला तोड़ा। इसके बाद स्थानीय टैंकर से आग बुझाने के प्रयास किए। कस्तूर सिंह ने बताया- फायर ब्रिगेड को भी कॉल किया था, लेकिन 45 मिनट तक कोई फायर ब्रिगेड यहां नहीं आई। यहां से जैसलमेर करीब 9 किमी दूर है। कस्तूर सिंह का दावा है कि बस से 16 लोगों को ही बाहर निकाला गया। इसमें करीब 40 लोग और थे, जो अंदर ही जल गए हैं। DNA सैंपल के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हादसे में मरने वालों की पहचान के लिए उनके दो परिजनों से DNA सैंपल लिया जाएगा। इसके लिए महात्मा गांधी अस्पताल जोधपुर के कॉटेज संख्या 4 और 5 में और जैसलमेर स्थित जवाहर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में विशेष व्यवस्था की गई है। हेल्पलाइन नंबर जिला नियंत्रण कक्ष जोधपुर- 0291-2650349, 2650350 महात्मा गांधी अस्पताल- 09414159222 राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) जोधपुर-9414919021 ट्रॉमा सेंटर ,जवाहर अस्पताल, जैसलमेर-9460106451, 9636908033 जैसलमेर हेल्पलाइन नंबर- 9414801400, 8003101400, 02992 252201, 02992 255055 —- बस अग्निकांड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… आग का गोला बनी बस, हाथ जोड़कर यात्री बोले-बचा लो:ग्रामीण पानी के टैंकर लेकर दौड़े, रोती रहीं महिलाएं; देखें हादसे की 13 PHOTOS 5 दिन पहले खरीदी थी बस, आग का गोला बनी:275-किमी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 16 घायलों को जैसलमेर से जोधपुर भेजा, एक की रास्ते में मौत क्यों मौत की वजह बन जाती हैं स्लीपर बस?:पतली गैलरी हादसे के वक्त भागने का मौका नहीं देती, चीन 13 साल पहले कर चुका बैन आग लगते ही लॉक हो गया था बस का दरवाजा:चश्मदीद बोला-आर्मी ने JCB से गेट तोड़ा, अंदर लाशें थीं; नॉर्मल बस AC में मॉडिफाई थी