जालंधर के गांव सोफी निवासी लवप्रीत सिंह दुबई में चार महीने तक बंधक बने रहने के बाद सकुशल भारत लौट आए हैं। उन्हें एक ट्रैवल एजेंट ने धोखा देकर दुबई भेजा था, जहां कंपनी ने उनका वेतन रोक लिया और पासपोर्ट भी जब्त कर लिया था। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल की पहल पर भारतीय दूतावास की मदद से उनकी वापसी संभव हो पाई। लवप्रीत सिंह ने बताया कि दुबई में काम के दौरान उन्हें भयावह माहौल का सामना करना पड़ा। सायरन बजते ही सब कुछ बंद हो जाता था और आज भी उन सायरनों की आवाज उनके कानों में गूंजती है। जिस कंपनी में उन्होंने चार महीने काम किया, उसने उनका वेतन रोक लिया और पासपोर्ट भी जब्त कर लिया था। 4 महीने बाद लौटा युवक करीब पांच महीने बाद दुबई से लौटे लवप्रीत सिंह ने सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया में राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल का धन्यवाद किया। लवप्रीत ने बताया कि एक ट्रैवल एजेंट ने उनके साथ धोखाधड़ी की। उन्हें दो महीने के टूरिस्ट वीजा पर दुबई भेजा गया था। लवप्रीत के अनुसार, एजेंट ने उन्हें पैकिंग का आसान काम दिलाने का वादा किया था। हालांकि, दुबई पहुंचने पर उन्हें एक स्टील कंपनी में काम पर लगा दिया गया। उनकी मासिक तनख्वाह 1300 दिरहम (लगभग 33 हजार रुपये) तय हुई थी, लेकिन कंपनी ने चार महीने तक काम करवाने के बावजूद उन्हें कोई वेतन नहीं दिया। कंपनी ने नहीं कराया युवक का इलाज इस दौरान लवप्रीत बीमार पड़ गए, लेकिन कंपनी ने उनका इलाज भी नहीं करवाया। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिससे भारत में उनका परिवार चिंतित था। माता-पिता को अपने बेटे के रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी पैसे भेजने पड़ रहे थे, जबकि लवप्रीत कर्ज चुकाने के लिए दुबई गए थे। लवप्रीत की मां ने 6 अप्रैल को राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के कार्यालय पहुंचकर अपने इकलौते बेटे को भारत वापस लाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लवप्रीत वेतन मांगते थे, तो कंपनी के कर्मचारी उन्हें डराते और धमकाते थे। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ उन्होंने अपने बेटे को विदेश भेजा था। संत सीचेवाल ने बताया कि लवप्रीत सिंह की वापसी के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखा गया था, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए 13 मई को उसे सुरक्षित भारत वापस भेज दिया गया। उन्होंने पंजाब के युवाओं से अपील की कि वे पूरी जांच-पड़ताल और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही विदेश जाएं। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने पहल करते हुए लवप्रीत को सुरक्षित भारत पहुंचाने में मदद की।