NEET-2026 पेपर लीक को लेकर परीक्षा से करीब 8 महीने पहले ही तैयारी कर ली गई थी। राजस्थान में इसके लिए 45 लाख रुपए में डील हुई थी। गिरोह ने 143 प्रश्न गेस पेपर से आने की गारंटी भी दी थी। हालांकि 120 प्रश्न ही आने पर माफियाओं तक कम रुपए पहुंचे थे। मामले में अब तक नासिक से शुभम खैरनार, जयपुर से दो भाई दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल, सीकर के राकेश मंडवरिया समेत कई लोगों को पकड़कर पूछताछ की जा रही है। महाराष्ट्र से राजस्थान तक कैसे पहुंचा पेपर 1- सीकर से नीट की तैयारी की थी,फिर माफियाओं के संपर्क में आया जांच में सामने आया है कि सबसे पहले महाराष्ट्र के अहिल्याबाई नगर के रहने वाले धनंजय नाम के युवक ने शुभम खैरनार नासिक (महाराष्ट्र) को पेपर दिया था। शुभम खैरनार ने पेपर हरियाणा के यश यादव को दिया था। यश यादव ने सीकर में रहकर नीट की तैयारी की थी। यश यादव जमवारामगढ़ (जयपुर) के दो भाई दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल के संपर्क में आया था। 2- जयपुर के भाइयों ने 45 लाख में की डील हरियाणा के यश यादव ने दोनों भाइयों दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल से नीट के पेपर के लिए 45 लाख में डील की थी। गारंटी भी दी थी कि उनके बताए 143 प्रश्न परीक्षा में आए थे। परीक्षा से पहले दोनों भाई करीब 30 लाख रुपए दे चुके थे। बाकी अमाउंट पेपर होने के बाद देना तय हुआ था। हालांकि पेपर में 120 से 130 प्रश्न ही गेस पेपर से आए थे। 3- परीक्षा से 2 दिन पहले दो हजार में बेचा था पेपर सूत्रों के अनुसार- दिनेश और मांगीलाल पिछले साल भी पेपर माफिया के कांटेक्ट में थे। इस बार यश यादव के जरिए माफियाओं ने दीपावली के पास ही बोल दिया था कि पेपर मिल जाएगा। इसके बाद दोनों भाइयों ने अपने करीबी कई छात्रों को पेपर देने की डील की थी। दोनों भाइयों की माफियाओं से 45 लाख में डील हुई थी लेकिन पेपर से दो दिन पहले तक 2 हजार रुपए तक में स्टूडेंट्स तक पहुंचा था। दिनेश और मांगीलाल दोनों भाइयों ने जमवारामगढ़ के अन्य छात्र को भी पेपर दिया था। बता दें कि पिछले साल जमवारामगढ़ के कई स्टूडेंट्स का नीट में सिलेक्शन हुआ था। पुलिस से बचने गेस पेपर का नाम दिया सूत्रों के अनुसार- पिछले साल 2025 में भी नीट के कई राज्यों में पेपर लीक होने जैसे मामले सामने आए थे। इस बार गिरोह ने पुलिस से बचने के लिए गेस पेपर का नाम देकर स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचाया था। सीकर की एक कोचिंग में पढ़ाने वाले फिजिक्स टीचर के पास एक स्टूडेंट और अन्य टीचर के लिए जरिए गेस पेपर पहुंच गया। फिजिक्स टीचर ने परीक्षा के अगले दिन 4 मई को उद्योग नगर थाने में इसकी शिकायत की थी। इसके बाद उन्होंने NTA में शिकायत की थी। NTA में शिकायत होने के बाद IB को जानकारी शेयर की गई। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे मामले का खुलासा हुआ। टेलीलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए मिला था पेपर अभी तक जांच एजेंसियों को भी यह स्पष्ट नहीं कि आखिरकार कितने लोगों तक यह पेपर पहुंचा है। सीकर से कई छात्रों को SOG टीम अपने साथ लेकर गई थी। माना जा रहा है कि उन्होंने पेपर खरीदने की डील की थी। जिन छात्रों को पूछताछ के बाद छोड़ा गया उन्हें टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए पेपर मिला था। अब सीबीआई में मामला दर्ज है। — ये खबर भी पढ़िए- NEET पेपर लीक- ‘गेस पेपर’ बनाकर 10 राज्यों में बेचा:120+ सवाल हूबहू मिले, परीक्षा से 3 सप्ताह पहले माफियाओं के पास पहुंचा पेपर माफिया ने पेपर लीक को छिपाने के लिए इसे ‘गेस पेपर’ का नाम दिया, ताकि जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके। (पढ़िए पूरी खबर)
