राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की प्राध्यापक (इतिहास) भर्ती परीक्षा-2022 में एक डमी अभ्यर्थी बैठाकर नौकरी हासिल करने के आरोपी को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया। SOG ने मामले में मुख्य आरोपी राजेश कुमार मीणा और RPSC के यूडीसी मानसिंह मीणा को गिरफ्तार किया। कोर्ट से राजेश मीणा को 18 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मानसिंह मीणा ने रिकॉर्ड बदलने के लिए 8 लाख रुपए लिए थे। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया- आरोपी राजेश कुमार मीणा ने अक्टूबर 2022 में आयोजित प्राध्यापक (इतिहास) भर्ती परीक्षा में परिचित उम्मेद सिंह को डमी अभ्यर्थी के रूप में बैठाया। उम्मेद सिंह ने 17 अक्टूबर 2022 को सामान्य ज्ञान और 18 अक्टूबर 2022 को इतिहास विषय की परीक्षा राजेश कुमार मीणा के स्थान पर दी। परीक्षा के दौरान अटेंडेंस शीट पर भी उम्मेद सिंह ने अपनी फोटो लगाकर राजेश कुमार मीणा के हस्ताक्षर की नकल की। RPSC के रिकॉर्ड में अटेंडेंस शीट में फोटो बदलवाई विशाल बंसल ने बताया- इस फर्जीवाड़े के जरिए राजेश कुमार मीणा परीक्षा में सफल होकर प्राध्यापक (इतिहास) पद पर नियुक्त हो गया। बाद में उसने RPSC के रिकॉर्ड में मौजूद अटेंडेंस शीट से डमी अभ्यर्थी की फोटो हटवाकर अपनी फोटो लगवाने का प्रयास किया, ताकि भविष्य में इस फर्जीवाड़े का खुलासा न हो सके। जांच में सामने आया कि आरपीएससी अजमेर में कार्यरत यूडीसी मानसिंह मीणा ने रिकॉर्ड में हेरफेर करने के एवज में 8 लाख रुपए की मांग की थी। आरोप है कि इसमें से 2 लाख रुपए एडवांस के रूप में भी लिए गए। डमी अभ्यर्थी पहले ही हो चुका गिरफ्तार मामले में एसओजी थाने में अभियोग संख्या 11/2025 दर्ज किया गया था। इससे पहले डमी अभ्यर्थी उम्मेद सिंह और सहयोगी रमेश विश्नोई उर्फ ढाका को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी राजेश कुमार मीणा मामला दर्ज होने के बाद से फरार चल रहा था, जिसे अब गिरफ्तार कर कोर्ट से 18 मई तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। वहीं, आरपीएससी के यूडीसी मानसिंह मीणा की शामिल होने का प्रमाणित होने पर उसे 12 मई को गिरफ्तार किया गया था। एसओजी अब मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
