राजसमंद शहर में सनवाड़ स्थित नवनिर्मित चारभुजा मंदिर पर रविवार से पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव की शुरुआत कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक मांगलिक चूंदड़ी परिधान पहनकर सिर पर कलश धारण कर यात्रा में शामिल हुई। वहीं समाज के लोग ठाकुरजी का बेवाण लेकर नाचते-गाते चल रहे थे। स्थानीय कुमावत समाज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत सुबह से ही फोरलेन स्थित रामदेव चौराहा खेड़ापति बालाजी मंदिर पर श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था। यहां कलशों में पवित्र जल भरकर विधिवत पूजन किया गया और गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा रवाना हुई। यात्रा में डीजे पर भक्ति गीतों की धुन पर युवा नृत्य करते नजर आए। जयकारों की गूंज रही
महोत्सव समिति के पदाधिकारी, बच्चे और श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन व जयकारों के साथ यात्रा में शामिल हुए। अधिकांश लोग मेवाड़ी पोशाक में नजर आए, जो आकर्षण का केंद्र रहे। कलश यात्रा सेवाली मोड़, राजनगर फव्वारा सर्कल और सनवाड़ चौराहा होते हुए मंदिर प्रांगण पहुंची, जहां पूजन एवं विसर्जन के साथ महोत्सव की औपचारिक शुरुआत हुई। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष जगदीश चन्द्र पालड़िया सहित पदाधिकारियों ने महोत्सव की व्यवस्थाओं को पुख्ता किया। यज्ञाचार्य पंडित जयप्रकाश श्रोत्रिय के निर्देशन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञानुष्ठान भी शुरू किया गया। मंदिर परिसर में वैदिक शैली से निर्मित यज्ञशाला में मंडप प्रवेश, मंडप पूजन और अन्नधिवास की विधियां संपन्न कराई गईं।
