डीडवाना के राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ‘नियोनेटल रिससिटेशन प्रोसीजर’ (एनआरपी) पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों को नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद सांस नहीं लेने जैसी गंभीर स्थिति से निपटने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के बाद का पहला ‘गोल्डन मिनट’ नवजात के जीवन के लिए सबसे अहम होता है और सही तकनीक अपनाकर कई शिशुओं की जान बचाई जा सकती है। एनआरपी दिवस अभियान के तहत हुआ आयोजन नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यशाला 10 मई को मनाए जाने वाले एनआरपी दिवस के अवसर पर देशभर में चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा थी। कार्यक्रम के समन्वयक एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी नागौरा ने बताया कि डॉ. एल. के. भारती के नेतृत्व में पूरे देश में नवजात शिशु पुनर्जीवन प्रशिक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में नवजात मृत्यु दर का एक बड़ा कारण जन्म के समय शिशु की सांस शुरू नहीं होना है। ऐसे में जन्म के तुरंत बाद के शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, जहां प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से नवजात को नया जीवन दे सकते हैं। दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ कार्यशाला का उद्घाटन प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह शेखावत एवं डॉ. सुरेश नेतड़ ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर डॉ. शेखावत ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद सांस नहीं ले पाने वाले नवजात शिशुओं के लिए एनआरपी तकनीक किसी जीवनरक्षक उपाय से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी को इस प्रक्रिया में दक्ष होना बेहद आवश्यक है।
‘गोल्डन मिनट’ में सही तकनीक से बच सकती है जान मुख्य प्रशिक्षक डॉ. सी. पी. नागौरा ने प्रशिक्षण के दौरान डमी (मैनिकन) के माध्यम से प्रैक्टिकल सत्र आयोजित किए। उन्होंने चिकित्सा कर्मियों को बताया कि जन्म के पहले ‘गोल्डन मिनट’ में सही वेंटिलेशन और दबाव तकनीक अपनाने से नवजात शिशु की जान बचाई जा सकती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने, उपकरणों के सही उपयोग, आवश्यक दवाओं तथा उपचार पद्धतियों की विस्तृत जानकारी भी दी गई। कार्यशाला में व्यवहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया ताकि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य कर्मी तुरंत और प्रभावी तरीके से कार्य कर सकें।

डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने लिया हिस्सा कार्यशाला में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविन्दर चौधरी, डॉ. पूनम सोमरा, नर्सिंग ऑफिसर लक्ष्मण भाटी, नीतू चौधरी, सुनीता बोला, सुनीता पूनिया, माया कुमावत, मंजू महला, सुमित्रा ढाका और सुमन चौधरी सहित लेबर रूम टीम एवं पीडियाट्रिक विभाग के कर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षणार्थियों को दिए गए प्रमाण पत्र कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में नर्सिंग अधीक्षक गणेशराम चौधरी, तकनीकी सहायक अमरीश माथुर, दिलीप सेन, खुशबू पंवार सहित अस्पताल स्टाफ भी उपस्थित रहा। अंत में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह शेखावत ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और चिकित्सा कर्मियों का आभार व्यक्त किया।