राजसमंद जिले के मोलेला गांव के प्रसिद्ध टेराकोटा कलाकार दिनेश चंद्र कुम्हार को ‘माटी के लाल 2026’ सम्मान मिलने के बाद परिवार और गांव में खुशी है। यह सम्मान उन्हें श्रीयादे माटी कला बोर्ड द्वारा माटी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट, नवाचार एवं विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के साथ बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राहुल राज भी मौजूद रहे। सम्मान प्राप्त करने के बाद दिनेश चंद्र जब अपने पैतृक गांव मोलेला पहुंचे तो उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने बचपन से ही अपने पिता मोहनलाल कुम्हार के साथ टेराकोटा कला सीखी। उन्होंने बताया कि पहले इस कला में केवल देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई जाती थीं, लेकिन अब प्रेरणादायक प्रसंगों को भी माटी में उकेरा जा रहा है, जिसे देश-विदेश में सराहना मिल रही है। मोलेला की टेराकोटा कला राजस्थान की एक प्राचीन और प्रसिद्ध हस्तकला है, जिसमें कुम्हार समुदाय बिना चाक के, केवल हाथों से बनास नदी की मिट्टी से मूर्तियां और रिलीफ पट्टिकाएं तैयार करता है। पकने के बाद इन्हें गेरू जैसे प्राकृतिक रंगों से सजाया जाता है। इस परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में पद्मश्री मोहनलाल कुम्हार का अहम योगदान रहा है। उनके बेटे दिनेश चंद्र कुम्हार ने भी इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है। दिनेश चंद्र अब तक 35 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दे चुके हैं और उन्हें इंटरनेशनल क्राफ्ट्स अवार्ड (2019), राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार और राष्ट्रीय तुलसी सम्मान (2023) सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
