जगराओं नगर कौंसिल अध्यक्ष जतिंदरपाल राणा ने आरोप लगाया है कि शहर में करोड़ों रुपए के विकास कार्यों में कुछ अधिकारी और राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग अनावश्यक बाधाएं डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से विकास कार्यों के टेंडरों को बार-बार रद्द किया जा रहा है और उनकी तिथियां आगे बढ़ाई जा रही हैं। राणा के अनुसार, 7 और 8 अगस्त 2025 को प्रकाशित टेंडर 18 अगस्त को “तकनीकी कारणों” का हवाला देकर रद्द कर दिए गए थे। इसके बाद, 28 अगस्त को 7.46 करोड़ रुपए और 29 अगस्त को 1.88 करोड़ रुपए के नए टेंडर जारी हुए। इन्हें 22 और 23 सितंबर को खोला जाना था, लेकिन अब इनकी तारीखें पहले 30 सितंबर और फिर 15 अक्तूबर 2025 तक बढ़ा दी गई हैं। नगर कौंसिल की छवि हो रही धूमिलः राणा अध्यक्ष राणा ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से नगर कौंसिल की छवि धूमिल हो रही है और उसे आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने न तो परिषद अध्यक्ष से कोई परामर्श किया और न ही शहरवासियों को कोई जानकारी दी, जिससे ठेकेदारों के साथ उनकी मिलीभगत और भ्रष्टाचार की मंशा स्पष्ट होती है। सीवरेज और रोड स्वीपिंग का आउटसोर्स ठीक नहीं राणा ने कूड़ा उठाने और प्रसंस्करण को आउटसोर्स करने के सरकार के फैसले का समर्थन किया, क्योंकि नगर कौंसिल के पास इसके लिए अपनी जगह नहीं है। हालांकि, उन्होंने जलापूर्ति, सीवरेज और रोड स्वीपिंग को आउटसोर्स करने को अनुचित बताया। चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने की कोशिश जतिंदरपाल राणा ने बताया कि नगर कौंसिल के पास अपनी नई रोड स्वीपिंग मशीन है और ये काम परिषद बहुत कम लागत पर कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए इन कामों के टेंडर बुला रही है और नियमों की अनदेखी कर रही है। जतिंदरपाल राणा ने इस मामले को कैबिनेट मंत्री, मुख्य सचिव और निदेशक स्थानीय निकाय के संज्ञान में लाया है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की है। उन्होंने शहर के पार्षदों और निवासियों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है, ताकि जगराओं का विकास बाधित न हो।
