विजयादशमी पर कोटा के दशहरा मैदान में दुनिया के सबसे ऊंचे 221 फीट के रावण का दहन किया गया। लेकिन रावण पूरी तरह से जल नहीं पाया। बुधवार को हुई बारिश के कारण रावण का पुतला भीग गया था। रावण के अंदर बारूद पूरी तरह से जल गया, लेकिन रावण पूरी तरह से जल नहीं पाया। कुंभकरण का भी मुंह नहीं जल पाया। वहीं, पटाखों की आवाज से एक हाथी बेकाबू हो गया। इससे लोग इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर, विधायक संदीप शर्मा श्री राम रंगमंच पर मौजूद रहें। इससे पहले रियासत कालीन दरीखाने की रस्म गढ़ पैलेस में निभाई गई। रस्म के बाद चांदी की पालकी में लक्ष्मीनारायण भगवान हाथी पर विराजे और सवारी को निकाला गया। सवारी में हाथी, घोड़े, ऊंट गाड़ियां, बग्घियां और विभिन्न झांकियां शामिल हुई। देश के अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इसके बाद सवारी दशहरा मैदान में पहुंची। पूर्व महाराव इज्यराज सिंह और उनके बटे महाराज कुमार जयदेव सिंह खुली जीप से पहुंचे। इज्यराज सिंह सीता जी का पाने और जवारे का पूजन किया। इसके बाद रावण की नाभि में तीर चलाकर रावण का दहन किया गया। कोटा में रावण दहन से जुड़ी PHOTOS… कोटा के दशहरे की 3 बड़ी बात दुनिया का सबसे ऊंचा रावण का पुतला
विजयादशमी पर कोटा में दुनिया का सबसे ऊंचा 221 फीट का रावण का पुतला बनाया गया। इसके साथ ही कोटा का नाम इंडिया बुक और एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहें। दहन से पहले भगवान लक्ष्मीनारायण की निकली सवारी
रावण दहन से पहले भगवान लक्ष्मीनारायण की सवारी निकाली गई। शोभायात्रा में राम-सीता-हनुमान के जीवंत रूप, वानर और राक्षसों के युद्ध दृश्य को दिखाया गया। देश के कई प्रदेशों के लोक कलाकार ने प्रस्तुति दी। सवारी में हाथी, घोड़े, ऊंट गाड़ियां, बग्घियां और विभिन्न झांकियां शामिल हुई। शोभायात्रा में राम-सीता-हनुमान के जीवंत रूप, वानर और राक्षसों के युद्ध दृश्य भी दिखाए गए। राजस्थान ही नहीं देश के कई प्रदेशों के लोक कलाकार भी प्रस्तुति दी। घूमर, कच्ची घोड़ी, कजरी, बिंदौरी नृत्य के साथ अरुणाचल का टपू, बंगाल का छाऊ और केरल का कुंभाटी नृत्य भी पेश किया। महिलाओं के मंगल गीत और बैंड की धुन पर शोभायात्रा को भव्य बनाया गया। दशहरा मैदान में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए 10 जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पुतलों को कंकड़ मारने पहुंचे लोग
रावण दहन से पहले लोग सुबह से अपने परिवार,बच्चों और दोस्तों के साथ रावण,कुंभकरण,मेघनाद के पुतलों को देखने पहुंच रहे थे। कई लोगों ने रावण को कंकड़ पत्थर मारा। उनका कहना था कि ऐसा करने से सुख शांति रहती है।
