पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार रहे पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने वर्तमान प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता संदेह के घेरे में है। लोढ़ा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दृष्टिकोण से काम करने के कारण आम नागरिकों के बुनियादी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और नौकरशाही की कार्यशैली में गिरावट आई है। लोढ़ा ने मंगलवार को अपने शिवगंज स्थित आवास पर पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य और पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आर.पी. सिंह के साथ समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने दोनों वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों का साफा एवं पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने नगर पालिका और पंचायती राज चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री आवास पर विभागीय सचिवों के साथ भाजपा पदाधिकारियों की बैठक आयोजित होने को प्रशासनिक मर्यादाओं के विपरीत बताया। लोढ़ा ने कहा कि जिन व्यक्तियों के पास कोई निर्वाचित संवैधानिक पद नहीं है, उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों की इस प्रकार की बैठक पर नौकरशाही को आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए लोढ़ा ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षित सरपंच पदों में बदलाव के मामलों में प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि यदि आरक्षित पदों में परिवर्तन किया जाता है तो उसमें संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सिरोही जिले में इस संबंध में पूर्व में न्यायालय में दायर प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय कर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी।
लोढ़ा ने राज्य सरकार पर न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना करने के भी आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने सिरोही जिले में शराब तस्करी को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरात में अवैध शराब की तस्करी बढ़ी है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले में शराब बिक्री वर्ष 2023-24 में 380 करोड़ रुपए थी, जो 2025-26 में बढ़कर 574 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इसकी वजह यह हैं कि भाजपा से जुड़े लोग सीमावर्ती क्षेत्रों में जमकर शराब की तस्करी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने वालों पर भी कार्रवाई की जा रही है। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी और फीस वृद्धि के विरोध में छात्रों द्वारा जनप्रतिनिधियों से मिलने पर मुकदमे दर्ज किए जाने की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। वहीं, अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले आम नागरिकों पर भी पुलिस की ओर से मुकदमे दर्ज किए जाने को उन्होंने चिंताजनक बताया। लोढ़ा ने कहा कि यदि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका सीधा प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था और आमजन के विश्वास पर पड़ेगा।
