सीकर में आज भारतीय शिक्षण मंडल का 57वां स्थापना दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती थे। मुख्य वक्ता RSS के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ थे। मंच पर जिला कलेक्टर आशीष मोदी व RSS विभाग संघचालक ग्यारसीलाल जाट मंचस्थ थे। मुकेश शर्मा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारतीय शिक्षण मंडल में एक साल में 12 गतिविधि और 8 कार्य होते हैं। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने कहा कि आज संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की जरुरत है।‌ संस्कृत भाषा को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए काम में लिया जाता है। स्कूलों में बच्चे जब थर्ड लेंग्वेज में फ्रेंच और जर्मन चुनते हैं तो ये सोचने की बात है। मुख्य अतिथि जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि 228 सालों में भारतीयों की मूल मानसिकता बदल गई। युवाओं में व्यापार की जगह नौकरी के भाव बढ़े। नौकरी करना आत्मा को गिरवी रखने का तरीका। जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजस्थान ने सनातन संस्कृति के लिए त्याग किए। राजस्थानियों को पानी की कीमत पता थी, इसलिए आज भी पूरी दुनिया में प्याऊ लगाने वाले राजस्थानी ही होते हैं। सर्वकल्याण की भावना सिर्फ सनातन समाज की सोच है। नदी ही मानव सभ्यता का आधार होती है। पूरी दुनिया में स्वाभिमान की सबसे ज्यादा लड़ाई राजस्थान ने लड़ी। कार्यक्रम में वैदिक रीति-नीति से तैयार भारतीय कैलेंडर व पंचांग का विमोचन किया गया। मुख्य वक्ता RSS के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि उपनिवेशवाद ने मानव सभ्यताओं को नष्ट किया। हिंदुइज्म और हिंदुत्व में फर्क समझने की जरुरत है। बच्चों को पढ़ाने की बजाय उनका कैरियर बनाने की कोशिश हो रही है। मायड़ भाषा में पढ़ाने से बच्चे जल्दी समझेंगे। संचालन डॉ. मोनिका शर्मा व डॉ. आशा राणा ने किया।