जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) और आसपास के शुष्क इलाकों में वैज्ञानिकों ने जंपिंग स्पाइडर (कूदने वाली मकड़ी) की एक बिल्कुल नई प्रजाति की खोज की है। इस नई प्रजाति का नाम ‘मोग्रस शुष्का’ रखा गया है। यह नाम संस्कृत शब्द ‘शुष्क’ से प्रेरित है, जो यहाँ की जलवायु और मकड़ी के अनुकूलन को दर्शाता है। क्राइस्ट कॉलेज (केरल) के शोधकर्ता ऋषिकेश त्रिपाठी के नेतृत्व में हुई यह खोज प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ टैक्सोनॉमी’ के ताजा अंक में 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित हुई है। शोध टीम में गौतम कदम और आशीष जांगिड़ सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। 5 साल का कड़ा संघर्ष- ऐसे हुई ‘मोग्रस शुष्का’ की खोज इस नई प्रजाति की खोज के पीछे मुख्य शोधकर्ता ऋषिकेश त्रिपाठी की बरसों की मेहनत छिपी है। केरल के क्राइस्ट कॉलेज से जुड़े ऋषिकेश साल 2017 से 2022 तक लगातार जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) के चक्कर काटते रहे। इन 5 सालों के दौरान उन्होंने थार की भीषण गर्मी और कठिन रास्तों के बीच यहाँ की वाइल्डलाइफ डाइवर्सिटी (वन्यजीव विविधता) का बारीकी से अध्ययन किया। इसी फील्ड वर्क के दौरान उनका सामना इस अनोखी जंपिंग स्पाइडर से हुआ। वैज्ञानिक पहचान फील्ड से सैंपल इकट्ठा करने के बाद, लेबोरेटरी में इसके डीएनए और शारीरिक संरचना की तुलना दुनिया भर की अन्य मकड़ियों से की गई। जब यह किसी भी मौजूदा रिकॉर्ड से मैच नहीं हुई, तब जाकर इसे एक ‘बिल्कुल नई प्रजाति’ के रूप में मान्यता मिली। ऋषिकेश त्रिपाठी का यह शोध साबित करता है कि थार के रेगिस्तान में छिपे रहस्यों को उजागर करने के लिए धैर्य और निरंतरता की कितनी आवश्यकता है। क्या है मोग्रस शुष्का की खासियत? इस मकड़ी का सिर गहरे भूरे रंग का है जिस पर सफेद धारियां ‘U’ आकार बनाती हैं। जंपिंग स्पाइडर होने के नाते इसकी दृष्टि बहुत तेज होती है और यह जाला बनाने के बजाय उछलकर शिकार करती है। यह प्रजाति भीषण गर्मी और कम नमी वाले वातावरण में रहने की अभ्यस्त है। इसके चेहरे पर चार बड़ी और चमकदार आंखें होती हैं, जो इसे 360-डिग्री विजन देती हैं। इसका रंग हल्का भूरा और मिट्टी जैसा होता है ताकि यह मरुस्थल की रेत और सूखी झाड़ियों में छिप सके। मोग्रस शुष्का’ की शारीरिक माप ईको-सिस्टम के लिए बड़ी उपलब्धि-डीएफओ “डेजर्ट नेशनल पार्क में ‘मोग्रस शुष्का’ जैसी नई प्रजाति का मिलना हमारे संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। यह खोज साबित करती है कि थार का रेगिस्तान सूक्ष्म जीवों और कीटों की दृष्टि से भी बेहद समृद्ध है। पार्क प्रशासन शोधकर्ताओं को हर संभव सहयोग दे रहा है ताकि यहाँ की छिपी हुई जैव-विविधता दुनिया के सामने आ सके।”— बृजमोहन गुप्ता, डीएफओ, डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP), जैसलमेर राजस्थान बना हॉटस्पॉट वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत में ‘मोग्रस’ वंश की नई प्रजाति करीब 9 साल बाद खोजी गई है। इससे पहले 2017 में राजस्थान से ही ‘मोग्रस राजस्थानेन्सिस’ मिली थी। नई खोज के बाद अब राजस्थान दुनिया भर के कीट विज्ञानियों के लिए एक प्रमुख रिसर्च सेंटर बनकर उभर रहा है। चूंकि ‘मोग्रस शुष्का’ एक सूक्ष्म जीव है, इसके फोटो आमतौर पर मैक्रो-फोटोग्राफी के जरिए लिए जाते हैं। टीम में ये थे मौजूद क्यों खास है यह खोज? वैज्ञानिकों का मानना है कि थार का रेगिस्तान केवल गोडावण जैसे बड़े पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि छोटे कीटों के लिए भी एक सुरक्षित जेनेटिक रिजर्व है। यह खोज साबित करती है कि भारत के सेमी-एरिड ईको-सिस्टम (अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र) में अभी भी कई ऐसी प्रजातियां छिपी हैं, जिनका दुनिया के सामने आना बाकी है।
