जालंधर में गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी में हो रही कथित धांधली और कम गैस मिलने की शिकायतों को लेकर उपभोक्ताओं में भारी रोष है। एक महिला उपभोक्ता ने एजेंसी संचालकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घरों में मिलने वाले सिलेंडरों में से गैस चोरी की जाती है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन एजेंसी आकर भारी सिलेंडर खुद ढोना पड़ता है। वहीं, विरोध करने पर एजेंसी द्वारा कनेक्शन काटने और गैस न देने की धमकियां दी जा रही हैं। रविवार की छुट्टी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग एजेंसी के बाहर लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतज़ार करते दिखे। एक महिला उपभोक्ता ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। महिला का आरोप है कि होम डिलीवरी करने वाले कर्मचारी सिलेंडरों से गैस निकाल लेते हैं, जिससे घर पहुंचने वाला सिलेंडर वजन में कम होता है। उन्होंने कहा की मेरा कोई शौक नहीं है कि मैं इतनी गर्मी में भारी सिलेंडर उठाकर खुद घर ले जाऊं, लेकिन घर पर पूरा सिलेंडर न मिलना मेरी मजबूरी बन गया है।
एजेंसी की धमकीस, नहीं मिलेगा सिलेंडर पीड़ित महिला ने खुलासा किया कि जब उन्होंने इस धांधली के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें फोन पर धमकी दी गई। महिला ने बताया की मुझे फोन करके कहा गया कि अब आपको कोई सिलेंडर नहीं मिलेगा, हमें पीछे से मालिकों का ऑर्डर है। मेरा कनेक्शन तक बंद करने की बात कही गई है। 25 दिन के नियम के बाद डिलवरी नहीं उपभोक्ताओं ने बताया कि गैस सिलेंडर की बुकिंग और सप्लाई के नियमों को लेकर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। महिला ने बताया कि 4 मार्च के बाद आज 31 मार्च (रविवार) को 25 दिन का समय पूरा होने पर भी उन्हें सिलेंडर के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी नियमों और असल हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क है, जिससे आम जनता की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगड़ रहे हैं।
एंजेसियों पर लोगों की लगी रही लंबी कतारें
वहीं जमशेर के पास गैस एंजेसियों पर लोगों की लंबी कतार देखने को मिली। लोग दूर-दराज के गांवों से जमशेर सिलेंडर लेने पहुंचे थे। एजेंसी के बाहर का नजारा किसी मेले जैसा था, जहां लोग घंटों धूप में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कुछ लोग थक हारकर जमीन पर बैठे नजर आए, तो कुछ ने सरकार और एजेंसी के बीच तालमेल की कमी पर गुस्सा जाहिर किया। वहां मौजूद अन्य उपभोक्ताओं ने भी अपनी व्यथा सुनाई। मेडिकल लाइन और अन्य पेशों से जुड़े लोगों ने कहा कि उन्हें काम छोड़कर सिलेंडर के लिए लाइन में लगना पड़ता है क्योंकि होम डिलीवरी का कोई भरोसा नहीं है। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि मोदी जी तक शायद हमारी बात पहुंच जाए, क्योंकि स्थानीय स्तर पर एजेंसी वाले किसी की नहीं सुनते।
