जालोर के बहुचर्चित गणपतसिंह हत्याकांड में आरोपियों ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पूछताछ में सामने आया कि महिला आरोपी ने इशारा कर आरोपी को शाम को बुलाया, फिर सुनसान रास्ते पर ले गई। वहां पहले से बैठे गजेन्द्र सिंह ने दरांती (कूट) से गणपत के सिर पर कई वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद गजेन्द्र सिंह जोधपुर भाग गया, जबकि आरोपी वागाराम ने हथियार को अपने खेत की ढाणी में छिपा दिया था। पुलिस ने अब हत्या में उपयोग हुए कूट को बरामद कर लिया है। दरअसल, 27 अगस्त 2024 मांडोली गांव के रहने वाले किराना व्यापारी गणपत सिंह लापता हो गया था, जिसकी डेड बॉडी अगले दिन 28 अगस्त को मांडोली गांव सिकवाड़ा रोड पर कीचड़ में मिली थी। जांच में सामने आया कि बेटे सुरेंद्र सिंह के अवैध संबंधों को छिपाने के लिए बेटे गजेंद्र ने पूरी हत्या की साजिश रची थी। 3 प्वॉइंट्स में समझिए पूरा मामला शादी और कार्यक्रम बने जांच में बाधा
जांच अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया- घटना वाले दिन पास ही एक कृषि बेरे पर शादी समारोह और दूसरी जगह कृष्ण जन्माष्टमी का कार्यक्रम चल रहा था। भारी भीड़ और मोबाइल नेटवर्क में अधिक लोकेशन आने से पुलिस को तकनीकी साक्ष्य जुटाने में काफी दिक्कत आई। साथ ही आरोपियों के पास मोबाइल नहीं होने से जांच और मुश्किल हो गई। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि वागाराम ने करीब 2 साल तक आरोपी को अपने खेत में बने झोपड़े में छिपाकर रखा, जिससे मामला लंबे समय तक खुल नहीं पाया। पुलिस और परिवार को गजेंद्र सिंह पर शक था
थानाधिकारी ने बताया कि करीब 18 महीने पुराने इस हत्याकांड में गणपत सिंह के परिवार को हमेशा से गजेंद्र सिंह पर शक रहा है। परिवार के साथ पुलिस भी गजेंद्र सिंह से पहले पूछताछ कर चुकी थी। गजेंद्र सिंह और दो अन्य संदिग्ध का नार्को टेस्ट कराने का भी प्रयास किया गया था। हालांकि, गजेंद्र ने परिवार के लिए 3 करोड़ की एफडी करवाने की बात कहकर टेस्ट से इनकार कर दिया था। यह मामला कोर्ट में चल रहा है। कीचड़ में शव मिला था, सिर पर चोट व्यापारी के बड़े भाई अभय सिंह की रामसीन थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट के अनुसार- 27 अगस्त 2024 को गणपत सिंह दुकान से निकलने के बाद लापता हो गया था। अगले दिन मिली गणपत की डेडबॉडी पर चोट के निशान थे और पास में ही बाइक गिरी हुई थी। जांच में पुलिस ने हत्या की आशंका जताई थी। भूख हड़ताल पर रही बुजुर्ग मां 17 नवंबर 2025 को को पहली बार परिवार 9 दिन धरने पर बैठा था। गणपत की मां इस धरने में भी बैठी थीं। इसके बाद 27 फरवरी 2026 से बुजुर्ग हवा कंवर फिर से परिवार के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गई थीं। दोनों धरने में गणपत सिंह की पत्नी, बच्चे, भाई और भाभी भी बैठे थे। विधायक भाटी से मुलाकात के बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने क्रमिक अनशन शुरू किया था, लेकिन बुजुर्ग हवा कंवर लगातार भूख हड़ताल पर हैं। …. गणपत सिंह हत्याकांड से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… गणपत सिंह हत्याकांड-विधायक भाटी के सामने रोने लगा परिवार:भूख हड़ताल पर बैठी मां बोलीं-धरना समाप्त करने के लिए पुलिस दबाव बनाती है