उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में चल रहे संपत्ति विवाद मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। विवाद पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और उनकी बहन पद्मजा कुमारी परमार के बीच है। पद्मजा कुमारी ने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के लिए ‘लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ (प्रशासन पत्र) की मांग की थी। पद्मजा का दावा था कि बिना वसीयत बनाए उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। हाईकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की इस मांग को खारिज कर दिया। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा- जब तक भाई द्वारा पेश किए गए वसीयतनामे से संबंधित दावा कोर्ट में लंबित है। तब तक ‘बिना वसीयत’ होने के आधार पर कोई भी कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती है। पद्मजा को अपने भाई लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के केस के जवाब के तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़ी अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति दी गई है। अब मामले में अगली सुनवाई 4 मई को होगी। अरविंद सिंह मेवाड़ की मौत के बाद विवाद सामने आया यह कानूनी लड़ाई दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति से जुड़ी है। अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को उदयपुर में हुआ था। पद्मजा कुमारी ने कोर्ट में यह दावा करते हुए याचिका दायर की थी कि उनके पिता की मृत्यु बिना किसी वैध वसीयत के हुई है। दोनों भाई-बहन के बीच सिटी पैलेस और एचआरएच होटल्स ग्रुप समेत अन्य संपति के हक को लेकर विवाद है। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ परिवार के उत्तराधिकारी और एचआरएच ग्रुप ऑफ होटल के मालिक हैं। मेवाड़ के पूर्व राज परिवार में लंबे समय से संपत्ति विवाद उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य भगवत सिंह मेवाड़ के 3 बच्चे महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी कुमारी हुए। भगवत सिंह मेवाड़ ने 1983 में पारिवारिक संपत्तियों को बेचने और लीज पर देने का फैसला किया था। उनका यह फैसला बड़े बेटे महेंद्र सिंह को रास नहीं आया था। वे अपने पिता के खिलाफ कोर्ट चले गए थे। इसके बाद बड़े बेटे से नाराज भगवत सिंह मेवाड़ ने अपनी वसीयत और संपत्ति से जुड़े फैसलों की जिम्मेदारी छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ को सौंप दी थी। इसके बाद महेंद्र सिंह मेवाड़ को ट्रस्ट और संपत्ति से लगभग बाहर कर दिया गया था। 3 नवंबर 1984 को भगवत सिंह के निधन के बाद मेवाड़ के पूर्व राज परिवार का संपत्ति विवाद और गहरा गया था। 37 साल तक कानूनी लड़ाई के बाद 2020 में उदयपुर की जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए विवादित संपत्ति को 4 हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा भगवत सिंह मेवाड़ के नाम और बाकी तीन हिस्से उनकी तीनों संतानों के बीच बांटने के आदेश हुए। कोर्ट के फैसले तक अधिकांश संपत्ति अरविंद सिंह मेवाड़ के कब्जे में रही, जबकि महेंद्र सिंह मेवाड़ और उनकी बहन योगेश्वरी कुमारी को सीमित हिस्सा मिला। कोर्ट ने शंभू निवास पैलेस, बड़ी पाल और घासघर जैसी संपत्तियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी थी। …. यह खबरें भी पढ़ें… उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में संपत्ति विवाद:लक्ष्यराज की बहन ने अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को किया चैलेंज; दिल्ली हाईकोर्ट में चलेगा केस उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में चल रहा संपत्ति विवाद सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल दिसंबर 2025 को पहुंच गया था। सुप्रीम कोर्ट में अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को चुनौती दी गई थी। (पूरी खबर पढ़ें)