‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के 6 जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इनमें राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मेहरादासी गांव के निवासी सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा भी शामिल है। उनके नाम को शहादत के करीब एक साल बाद नेशनल वॉर मेमोरियल (राष्ट्रीय युद्ध स्मारक) की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ (Roll of Honour) में शामिल कर लिया गया हैं। सुरेंद्र कुमार अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। वे उधमपुर की 39 विंग में ‘मेडिकल असिस्टेंट सार्जेंट’ के पद पर कार्यरत थे। करीब 14 वर्षों से एयरफोर्स की मेडिकल विंग में अपनी सेवाएं दे रहे थे। 10 मई, 2025 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर सेक्टर में पाकिस्तान के हवाई हमले में सुरेंद्र मोगा गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्होंने इलाज के दौरान वीरगति प्राप्त की थी। पहले देखिए- जवान की शहादत से जुड़ी 3 तस्वीरें पत्नी भावुक हुईं, बोलीं- यह दिन सबसे कठिन, लेकिन सबसे गौरवशाली भी
शहीद सुरेंद्र मोगा को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा मिलने के बाद उनकी पत्नी वीरांगना सीमा देवी ने भावुक शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे कठिन, लेकिन सबसे गौरवशाली दिन है। सीमा देवी ने बताया कि सबसे पहले उन्हें दिल्ली से एयरफोर्स की एक अधिकारी का फोन आया, जिन्होंने यह जानकारी दी कि उनके पति सुरेंद्र मोगा को आधिकारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा प्रदान कर दिया गया है। इसके कुछ ही देर बाद उनके ससुर का फोन आया और उन्होंने भी यह गौरवपूर्ण समाचार साझा किया। यह सुनकर उनका सीना गर्व से भर गया। उन्होंने कहा कि एक पत्नी के रूप में पति को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अभी दोनों बच्चे दक्ष और वर्तिका सीकर में एजुकेशन ले रहे हैं। दक्ष तीसरी और वर्तिका आठवीं क्लास की स्टूडेंट है। दोनों अपने पिता को खोने के गहरे दुख और उनके देश के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के गर्व के साथ जीवन जी रहे हैं। सीमा देवी ने कहा कि यह शहादत केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे जिले और पूरे देश की है। उन्होंने कहा- एक पत्नी का सुहाग उजड़ने का दर्द मैं ही जानती हूं, लेकिन आज मेरे मन में एक अलग ही सुकून है। अब पूरी दुनिया जान गई है कि सुरेंद्र मोगा ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। उन्होंने बताया कि वे सीकर में अपने बच्चों का पालन-पोषण उन्हीं संस्कारों के साथ कर रही हैं, जो उनके पति का सपना थे। उन्होंने कहा कि उनका परिवार कभी हार नहीं मानेगा और उनके पति का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। सीमा देवी ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरे पति देश के वीर सपूत थे। उनका बलिदान हमेशा देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा। पिता CRPF से और ससुर वायु सेना से रिटायर्ड
शहीद सुरेंद्र कुमार के पिता शिशुपाल मोगा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) से और चाचा प्यारेलाल मोगा भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं। ससुर रामनिवास मील भी भारतीय वायु सेना से रिटायर्ड हैं। सुरेंद्र ने बचपन से पिता को और दूसरे रिश्तेदारों को आर्मी की यूनिफॉर्म में देखा था, ऐसे में देश सेवा का जज्बा बचपन से था। इसके बाद सुरेंद्र ने साल 2010 में एयरफोर्स जॉइन की थी। वे करीब 14 सालों से भारतीय वायुसेना में सेवारत थे। मरणोपरांत ‘वायु सेना मेडल (गैलंट्री)’ से सम्मानित
शहीद सुरेंद्र मोगा को सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत ‘वायु सेना मेडल (गैलंट्री)’ से सम्मानित किया गया। 93वें वायु सेना दिवस के अवसर पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर आयोजित समारोह में भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने यह वीरता सम्मान शहीद की वीरांगना पत्नी सीमा मोगा को प्रदान किया था। सम्मान ग्रहण करते समय वीरांगना सीमा मोगा ने गर्व और भावनाओं के साथ कहा- सुरेंद्र मोगा हमेशा कहते थे- देश पहले हैं, बाकी सब बाद में। उन्होंने कहा- यह पुरस्कार मेरे पति की वीरता और त्याग का प्रतीक है।
अब 2019 में हुआ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन 2019 में इंडिया गेट के पास हुआ था। यहां स्वतंत्रता के बाद देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सैनिकों के नाम दर्ज किए जाते हैं। इन छह नामों के जुड़ने के साथ ही ऑपरेशन सिंदूर भी उन सैन्य अभियानों में शामिल हो गया है, जिन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आधिकारिक रूप से सम्मान दिया गया है। ये खबर भी पढ़िए… झुंझुनूं में शहीद की पत्नी बोलीं-आई लव यू यार:गाल पकड़ कर कहा-प्लीज उठ जाओ; बेटे ने सैल्यूट किया, पाकिस्तानी अटैक में गई थी जान पाकिस्तानी हमले में शहीद झुंझुनूं के एयरफोर्स जवान सुरेंद्र कुमार का अंतिम संस्कार किया गया। 8 साल के बेटे दक्ष ने मुखाग्नि दी। शहीद की बेटी वृतिका (11) का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रही हैं- मेरे पापा बहुत अच्छे थे। दुश्मनों का खात्मा कर खुद शहीद हो गए। पूरी खबर पढ़िए