सलूम्बर में मुहर्रम की दसवीं यौमे आशूरा शुक्रवार को मनाई गई। इस अवसर पर शहर में इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर मजलिसों का आयोजन किया गया। करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सेरिंग तालाब में किया ठंडा
शहर के बाहर और अंदर से ताजियों के जुलूस पारंपरिक मार्गों से निकाले गए। अन्दर का शहर का ताजिया मदरसा चौक स्थित अंजुमन से बोहरवाड़ी, आजाद मोहल्ला, होली चौक होते हुए रावली पोल पहुंचा। बाहर का शहर का ताजिया गांधी चौक, होली चौक और आजाद मोहल्ला से होते हुए रावली पोल पहुंचा। रावली पोल पर दोनों ताजियों की पारंपरिक सलामी की रस्म अदा की गई। इसके बाद ताजियों को सेरिंग तालाब में ठंडा किया गया। जुलूस के दौरान “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं। रास्तेभर विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं ने छबील लगाकर राहगीरों और अकीदतमंदों को ठंडा पानी, शरबत और अन्य पेय पदार्थ वितरित किए। समाज के लोगों के अनुसार, करबला में तीन दिन तक पानी बंद किए जाने की घटना की याद में छबील लगाना सेवा, इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। शहर के सदर मोहम्मद यूसुफ ने बताया कि मुहर्रम हजरत इमाम हुसैन और हजरत अब्बास की कुर्बानी, वफादारी और इंसानियत के संदेश को याद करने का अवसर है। अंदर शहर के सदर अताउल्लाह खान ने कहा कि यौमे आशूरा सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुहर्रम के संदेश को सत्य, इंसाफ, सब्र और कुर्बानी का बताया। डीएसपी हेरम्भ जोशी के निर्देशन में पूरे जुलूस मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी गई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। प्रशासन की सतर्कता और समाज के सहयोग से यह आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।