श्रीगंगानगर में शनिवार को साल 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, लोक अदालत की ओर से कई लोगों को बैंक के साथ समझौता करने के लिए नोटिस भेजे गए थे। लेकिन, नोटिस में न तो लोन अमाउंट भरा हुआ था और न ही अकाउंट नम्बर। युवक का कहना था कि उन्होनें कोई लोन लिया ही नहीं। फिर भी उनके पास नोटिस आ रहे हैं। अरविंदर सिंह निवासी दुल्लापुर केरी (श्रीगंगानगर) ने बताया- उनके चाचा हरजिंदर सिंह और अवतार सिंह के साथ 2022 में कोविड-19 एटीएल 2.0 लोन योजना के तहत राजस्थान ग्रामीण बैंक, ब्रांच दुल्लापुर केरी (श्रीगंगानगर) की ओर से फ्रॉड किया गया था। तत्कालीन ब्रांच मैनेजर प्रवीण कुमार ने फर्जी खाते खोलकर उन पर दो-दो लाख का लोन ले लिया और यह पैसे दूसरे लोगों के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। जिसमें करोड़ों का फ्रॉड किया गया। गांव में करीब 30 से 40 लोग हैं जिनके साथ यह फ्रॉड हुआ है। बैंक वालों ने पैसे ब्रांच मैनेजर से रिकवर कर लिए और बाद में बैंक मैनेजर को सस्पेंड कर दिया। इसका कोर्ट में केस चल रहा है। कुछ लोगों बैंक ने पैसा वापस कर दिया और हमें बोल रहे हैं कि इस लोन को चुकता कीजिए। बैंक वाले हमें राष्ट्रीय लोक अदालत के मार्फ़त हमें बार-बार नोटिस भेज रहे हैं। जिससे गांव में हमारी बदनामी भी हो रही है। जब हमने लोन लिया ही नहीं तो हम लोन क्यों भरें। बैंक द्वारा हमें बदनाम किया जा रहा है। अरविंदर ने बताया- बैंक वाले हमें धमकी दे रहे हैं कि अगर यह लोन नहीं भरा तो आपका केसीसी अकाउंट डिफाल्टर कर दिया जाएगा। अब जो लोक अदालत में समझौते के लिए नोटिस जारी किए गए हैं उसमें न तो लोन की अमाउंट है और न ही खाता नम्बर नोटिस पर लिखा है। सिर्फ खाताधारक का नाम है। अभी हम जब लोक अदालत में आए तो वर्तमान राजस्थान ग्रामीण बैंक, दुल्लापुर केरी का ब्रांच मैनेजर हमारे साथ बदतमीजी कर रहा है। गौरव आहूजा हमारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। हमारे केसीसी अकाउंट भी डिफॉल्टर किए जा रहे हैं। हम लोग अच्छे घरों से हैं। अगर हमने 50 लाख का कर्ज भी देना है तो हम चुकाएंगे। हम कर्ज चुकाने में समर्थ हैं, लेकिन इस फ्रॉड का पैसा हमने नहीं लिया। नवज्योत सिंह ने बताया- मेरे पिता अवतार सिंह को आंखों से कम दिखता है। राजस्थान ग्रामीण बैंक का ब्रांच मैनेजर प्रवीण कुमार 2022 में हमारे घर आया। ब्रांच मैनेजर ने उसके पापा से कहा कि उनके केसीसी वाले अकाउंट का रिन्यू करना है। जिसके बाद बैंक के कर्मचारियों ने उनसे डॉक्यूमेंट पर साइन करवा लिए और एक फर्जी अकाउंट खोलकर 2 लाख रुपए का लोन ले लिया। पिछले चार साल से बैंक वाले हमें लोन चुकाने के लिए नोटिस भेज रहे हैं। जबकि हमने लोन लिया ही नहीं और हमें उस लोन वाले अकाउंट का भी पता नहीं है। हमारी कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ब्रांच मैनेजर गौरव आहूजा ने बताया- एक करोड़ का क्लेम बैंक खाताधारकों को दे चुका है। जिनकी कंप्लेन बाद में आई है उनकी इंक्वायरी चल रही है। जिन किसानों का पैसा बैंक मैनेजर ने निकला था उनका निस्तारण कर दिया गया है। जिनके केसीसी, बैंक लोन बाकी है हमने उनको नोटिस जारी किए हैं। बाकी जब तक आरोप तैयार नहीं हो जाता तब तक हम कुछ नहीं कह सकते।
