राजस्थान में इस बार 2026 की गर्मी पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ सकती है। वैज्ञानिक अनुमान और पर्यावरणीय संकेत दोनों इस ओर इशारा कर रहे हैं कि इस बार ‘अर्ली और एक्सट्रीम समर’ के लिए तैयार रहना होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि रोहिड़ा (टीक का पेड़) के पेड़ों में फूल समय से पहले आ रहे हैं, यह संकेत पर्यावरण के हिसाब से अनुकूल नहीं है। अनुमान है कि मौसम में बड़ा फेरबदल होगा और भीषण गर्मी का दौर शुरू हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के साथ पर्यावरण विशेषज्ञ और ज्योतिषियों का आंकलन है कि इस बार तापमान पिछले सालों की तुलना में ज्यादा रह सकता है। ग्रहों की स्थिति भी हीट वेव के अनुकूल है। आशंका है कि तापमान 50 से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। ‘लॉन्ग रेंज फॉरकास्ट’ में हीटवेट की चेतावनी मौसम विभाग ने मार्च- मई तक का पूर्वानुमान जारी कर दिया है। इसमें इस बार की गर्मी पिछले सालों की तुलना में ज्यादा हॉट होने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा का कहना है- अभी जारी चेतावनी ‘लॉन्ग रेंज फॉरकास्ट’ है, यानी समय से काफी पहले की घोषणा है, जिसमें आंशिक परिवर्तन हो सकता है। इसके बाद भी मानना पड़ेगा कि इस बार गर्मी काफी तेज रह सकती है। यह है मौसम विभाग का मार्च से मई तक का आंकलन जानलेवा लू चलने की आशंका मार्च से मई के बीच उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य भारत में लू के दिनों की संख्या सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना।
अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका है। औसत बारिश होने का अनुमान मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा का कहना है- इस बार मार्च में देशभर में औसत वर्षा सामान्य रहने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा के संकेत। राजस्थान में प्री-मानसून बारिश सीमित रहने पर तापमान और तेजी से चढ़ सकता है। वहीं, महाराजा गंगा सिंह यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभागाध्यक्ष अनिल छंगाणी के अनुसार भी इस बार गर्मी काफी तेज रहेगी। तापमान 50 से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। छंगाणी का कहना है- हर बार प्रकृति संकेत देती है कि मौसम कैसा रहेगा? इस बार भी प्रकृति ने संकेत दिए हैं कि जबरदस्त गर्मी होगी। उन्होंने बताया कि इस बार रोहिडा के पेड़ों में जो मार्च में आने वाले थे, वह फरवरी से पहले ही आने लगे हैं। यह सब असामान्य तापमान वृद्धि के संकेत हैं। इस बार अप्रैल में ही जून जैसी गर्मी पड़ सकती है। ज्योतिष के ग्रहों में सूर्य के उग्र रहने की आशंका ज्योतिषाचार्य हरिनारायण व्यास मन्नासा ने बताया- फरवरी-मार्च से पश्चिमी राजस्थान में एंटी साइक्लोन सर्कुलेशन प्रभावी हो सकता है। मंगल, शनि और राहु-केतु की स्थिति हीटवेव को बढ़ा सकती है। ग्लोबल वॉर्मिंग भी बड़ा कारण हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने एक वजह ग्लोबल वार्मिंग को भी माना है। उनका कहना है कि तेजी से गर्म गैसों का उत्सर्जन हो रहा है, जिससे पूरा परिसंचरण तंत्र बिगड़ रहा है। इसके कारण भारत सहित पूरी दुनिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं।