नमस्कार जालोर में कांग्रेस के विधायक को कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री से जान का खतरा है। यही खतरा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस वाले मुखियाजी के बेटे को कांग्रेस के नेताओं से था। चर्चा है कि यहां कांग्रेस की मुख्य विरोधी पार्टी कांग्रेस ही है। उधर, वन मंत्रीजी कार में निकले। सड़क पर कचरा देख ठिठके। फिर एक लड़के को नसीहत दे दी। डूंगरपुर में ड्राइवर ने फॉर्च्यूनर को रॉकेट बना दिया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी पढ़िए… 1. विधायकजी को अपनी ही पार्टी के पूर्व मंत्रीजी से जान का खतरा विधायकजी ने ट्‌वीट कर दिया। लिखा पूर्व मंत्रीजी से जान का खतरा है। परिवार की रेकी की जा रही है। बच्चों का पीछा किया जा रहा है। लंबे समय से खतरे में हैं। जालोर के रानीवाड़ा से विधायकी करने वाले विधायकजी ने नाम नहीं लिखा। फॉलोअर्स पूछते रह गए। बताओ नेताजी! नाम बताने में क्या तकलीफ है? मामला जब परिवार तक पहुंच गया है तो विधायकजी ट्वीट करते क्यों रह गए। थाने जाते। पुलिस को बताते। नाम उजागर कर देते। लेकिन नहीं, बताकर बताया नहीं और छुपाकर छुपाया नहीं। आपसी खींचतान का आलम यह है कि 10 महीने पहले इन्हीं नेताजी पर मुंबई में नेतागिरी करने वाले उन्हीं के समाज के एक नेताजी ने आरोप लगाए थे। कहा था कि मुंबई आकर उन्होंने दुष्प्रचार किया था। विधायकजी 3 साल पहले भी सुर्खियों में रहे थे। तब एक महिला कारोबारी ने उन पर केस करा दिया था। जो आपस में लड़ रहे थे, उन्हीं के भरोसे पूर्व मुखियाजी ने अपने बेटे को जालोर से लोकसभा का चुनाव लड़वा दिया। नतीजा सभी के सामने है। अब विधायकजी खतरे में ही हैं तो आवाज खुलकर उठानी पड़ेगी। कुल्हड़ में गुड़ फोड़ने से कुछ नहीं होगा। 2. मंत्रीजी ने कचरे को लेकर दी सही वाली ‘नसीहत’ अलवर में वन मंत्रीजी का एक और वीडियो घूम रहा है। मंत्रीजी कार से नगर निरीक्षण को निकले। इस बार ट्रैफिक नियम का उल्लंघन नहीं किया। बाकायदा सीट बेल्ट लगाया। इस दौरान एक लड़के को रोड पर कचरा डालते देखा। गाडी रुकवाई। किशोर को इशारा कर बुलाया। प्यार से नाम पूछा। फिर कहा- क्या रोड पर ये कचरा अच्छा लगता है? किशोर झेंप गया। कचरा बैंक का था। लड़के ने कहा कि वह पिता की मदद के लिए बैंक आया है। मंत्रीजी ने कहा- कचरे की गाड़ी आती है, उसी में कचरा डालना चाहिए। इससे पहले मंत्रीजी बाला किले पर गए थे। माता रानी के दर्शन किए। बाइक राइड के दौरान हेलमेट नहीं लगाया था। अब भूल सुधार भी और सफाई को लेकर भी सीरियस दिखे। 3. ठेके को ठिकाने लगाने की ठान बैठी महिलाएं धौलपुर का कमालपुरा गांव। चूल्हा-चौका करने का वक्त। लेकिन महिलाएं घरों से गायब। गांव के मुख्य रोड पर ठेके के सामने दरी बिछाकर बैठ गईं। सबके हाथों में डंडे। साथ में बच्चे भी। एक ही रट। ठेका हटाओ। शोर शराबा सुनकर गांव के लोग जुटे। अचानक इन्हें क्या हुआ? हर पुरुष की आंखों में सवाल। एक महिला लाठी लेकर आगे आई। बोले- शराब ने घर बर्बाद कर दिया। पति शराब पीकर पीटता है। कर्ज लेकर पति को दुकान खुलाई। सारी कमाई शराब में फूंक दी। बच्चों का प्राइवेट स्कूल से नाम कटाकर सरकारी में दाखिला करा दिया। एक और महिला का हौसला बढ़ा। बोली- दायें जाओ तो स्कूल। बायें जाओ तो स्कूल। 500 मीटर के दायरे में दोनों तरफ स्कूल। ठेका खुला तो खुला कैसे? बच्चों का स्कूल जाना मुहाल हो गया है। धरने को लीड कर रहे बाल संत ने भी तेवर दिखाए। बोले-ठेके पर चौकी का नाम लिखा है। अगर ठेके का इतना ही पक्ष लिया जा रहा है तो खुलवा दो ठेका चौकी में ही। जिम्मेदारों के पास जवाब नहीं। आंखें मूंदकर किसने ठेका पास कर दिया? 4. चलते-चलते… बड़े-बुजुर्ग कहते हैं-खाकर सो जाओ, मारकर भाग जाओ। डूंगरपुर में 3 युवकों ने इसी युक्ति का इस्तेमाल किया। गुजरात से तफरी करते हुए फॉर्च्यूनर लेकर डूंगरपुर आ गए। शराब के नशे में थे। ढाबे पर खाना खाया। वहां मौजूद कुछ लड़कों से तू-तू मैं-मैं हो गई। नशा सिर पर सवार। उलझ बैठे। हाथापाई हो गई। इसी दौरान एक लड़के का सिर फोड़ दिया। नशा जाता रहा। जान पर बन आई। तीनों भागकर गाड़ी में घुसे और दौड़ लगा दी। दूसरी पार्टी भी कम नहीं। स्कूटरों से पीछा किया। फॉरच्यूनर वाला हैवी ड्राइवर निकला। अगला टायर फटकर रिम से अलग हो गया, लेकिन रफ्तार नहीं थमने दी। रिम से चिंगारियां निकलती रही। कार को रॉकेट बना दी। पीछे पूरा हुजूम आ रहा था। ड्राइवर ने भी कार को सीधे थाने ले जाकर टिकाया। पुलिस वाले भी हैरान। 5 किलोमीटर तक कैसे दौड़ाते रहे। तीनों को डिटेन किया तब जान बची। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…