हर साल सड़कों पर बिखरता खून, टूटते परिवार और कुछ मिनटों की देरी में चली जाती अनगिनत जानें- राजस्थान की सड़क दुर्घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि दर्दनाक हकीकत हैं। इन्हीं हादसों में “गोल्डन ऑवर” की अहमियत समझाते हुए जोधपुर में जन्मे और वर्तमान में अमेरिका में सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे डॉ. दिनेश व्यास ने एक ऐसी उपयोगी पुस्तक लिखी है, जो हादसे के वक्त सही प्राथमिक उपचार सिखाती है। यह किताब विशेष रूप से पुलिस, फायर ब्रिगेड कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ के लिए तैयार की गई है, लेकिन इसकी भाषा और तरीके इतने सरल हैं कि आम नागरिक भी इसे पढ़कर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सड़क दुर्घटना के समय घायल की किस प्रकार से मदद करें पुस्तक के बारे में साइंटिफिक पब्लिशर्स के डायरेक्टर तनय शर्मा ने बताया कि इस पुस्तक में सड़क दुर्घटना के समय घायल की किस प्रकार से मदद करें, उसे किस सावधानी के साथ अस्पताल तक ले जाया जाए। इसके अलावा विभिन्न पहलुओं पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई है। मुझे उम्मीद है कि इस पुस्तक को पढ़कर न सिर्फ पुलिस, फायर ब्रिगेड कर्मचारी, नर्स बल्कि आमजन भी इन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में अपनी एक सक्रिय भूमिका निभा सकेगा। पुस्तक में लिखे तरीके अपनाकर रोके जा सकते हैं सड़क हादसे इस पुस्तक में सड़क दुर्घटना होने के बाद किस प्रकार से घायल को संभाले, उनकी कैसे मदद करें। कई बार सड़क हादसे में हड्डी टूट जाती है, ऐसे में घायल व्यक्ति को कैसे सहारा दें और उसका प्राथमिक उपचार कैसे करें। इसके अलावा भी इस पुस्तक में कई कारगर तरीकों के बारे में लिखा गया है। जिसे अपनाकर सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को रोका जा सकता है, क्योंकि देश में सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतें चिंता का विषय बनी हुई है। स्कूल-कॉलेज में इस बुक को पढ़ाने की मांग कई बार लोग असमय ही मौत का शिकार बन जाते हैं। ऐसे में इस बुक को अब राजस्थान के अलावा केंद्र सरकार से भी मांग की गई है, कि इसे अलग-अलग संस्थाओं और प्रदेश की सरकारी स्कूल कॉलेज और पुलिस विभाग सहित महत्वपूर्ण विभागों में पढ़ाई जाए। उन्हें बताया जाए कि किस प्रकार से घायल का प्राथमिक उपचार किया जा सके। घायल को समय पर इलाज मिले तो बच सकती है जान इस पुस्तक को लिखने के पीछे का उद्देश्य क्या है, इसे लेकर डॉ. दिनेश व्यास ने बताया कि यदि सड़क दुर्घटना में कोई घायल व्यक्ति दिखे तो उसकी हम किस प्रकार से मदद करें। समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बचाई जा सकती है। इस पुस्तक को साइंटिफिक पब्लिशर्स की ओर से प्रकाशित किया गया है और उसे साइंटिफिक पब्लिशर्स की वेबसाइट के अलावा अमेजॉन से भी प्राप्त किया जा सकता है। गडकरी ने भी लोकसभा में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर दी थी जानकारी बता दें कि, सड़क हादसों के लेकर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक साल पहले लोकसभा में चर्चा के दौरान कहा था कि देश में सड़क हादसों की संख्या को देखकर कई बार अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में उन्हें अपना मुंह छुपाना पड़ता है, क्योंकि देश में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। हाल ही में उन्होंने दिसंबर में सड़क हादसों को लेकर संसद में जानकारी दी। राज्यसभा में उन्होंने बताया था कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें औसतन 1.8 लाख लोगों की जान जाती है। इनमें से 66 % मौतें युवाओं (18 से 34) साल की होती है। गडकरी ने बताया था कि उनका मंत्रालय अब राज्यों को आधुनिक एंबुलेंस देने की योजना बना रही है। इसके तहत एंबुलेंस हादसे की जगह पर 10 मिनट के भीतर पहुंचेगी। उन्होंने आईआईएम की एक स्टडी का भी हवाला दिया। बताया कि यदि घायलों को समय पर इलाज मिल जाए तो 50 हजार जिंदगियां बच सकती है।
