पाली में एक और ऑक्सीजन जोन की नींव सोमवार को रखी गई। यहां करीब 50 प्रजाति के पौधे महज 2-2 फीट की दूरी पर लगाए जाएंगे। 4 साल में यह सघन वन विकसित हो जाएगा। पौधों की ऊंचाई 30 फीट तक पहुंच जाएंगी। खासियत यह है कि इस जंगल का तापमान आस-पास के क्षेत्र से करीब 8 से 10 डिग्री कम होगा। शहरवासी यहां वॉकिंग कर सकेंगे। यहां भरपूर ऑक्सीजन मिलेगा। इसलिए यहां वॉकिंग ट्रैक भी बनाया गया है। आने वाले सालों में यह पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित होगा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने किया उद्घाटन
शहर के जोधपुर रोड सिंधियों की ढाणी के निकट 16 बीघा में 25 हजार पौधे मीयावा टक्नीक से सीईटीपी फाउंडेशन की ओर से लगाए गए है। जिसका उद्घाटन सोमवार शाम को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने फीटा काटकर किया। इस दौरान पाली विधायक भीमराज भाटी, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, पूर्व सांसद पुष्प जैन, पूर्व सभापति महेन्द्र बोहरा, जिला कलेक्टर एलएन मंत्री, डीएफओ पी बालामुर्गन, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आरओ अमित सोनी, सीईटीपी के अध्यक्ष अशोक लोढ़ा, सचिव एसपी चौपड़ा, धनराज दैय्या सहित कई उद्यमी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शहरवासी मौजूद रहे। इस ऑक्सीजन जोन को विकसित करने पर खर्च होंगे 85 लाख
सीईटीटी फाउंडेशन के सचिव SP चौपड़ा ने बताया कि जिला प्रशासन से सहमति के बाद गोचर भूमि पर सीईटीपी पाली की ओर से प्रथम चरण में यहां 16 बीघा जमीन पर 50 प्रजातियों के 25 हजार 308 पौंधे लगाए जा रहे है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 85 लाख रुपए खर्च होंगे। एनजीओ फॉरेस्ट क्रिएटर्स के एनके नायर को इस इसे विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसे घने जंगल में रूप में विकसित किया जा रहा है। हर पौधा करीब 2-2 फीट की दूरी पर लगाया गया है। इसमें फल, फूल और औषधि गुणों वाले पौधे शामिल हैं। स्प्रिंकलर पद्धति से होगी सिंचाई, तापमान होगा 10 डिग्री तक कम
पौधों की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर पद्धति से पानी दिया जा रहा है। पौधों की जड़ों में नमी बरकरार रहे, इसके लिए विशेष घोड़ा घास भी बिछाई गई है। 4 साल में पौधों की लंबाई 30 फीट तक पहुंचने की संभावना। विकसित होने पर यह घने जंगल का रूप लेगा। यहां आस-पास के क्षेत्र से करीब आठ से 10 डिग्री तापमान कम रहेगा। आस-पास के क्षेत्रों से कहीं ज्यादा ऑक्सीजन की मात्रा होगी। इस घने जंगल में लोग घूम सके, इसलिए इसके चारों तरफ 10-10 फीट का ट्रैक भी बनाया जा रहा है। यहां आकर शहरवासी शांति और सुकून का अनुभव कर सकेंगे। डॉ. अकीरा मीयावा पद्धति से बनेगा जंगल
फॉरेस्ट क्रिएटर्स के फाउंडर डॉ. आरके नायर ने बताया कि डॉ. अकीरा मीयावा पद्धति से घना जंगल विकसित किया जा रहा है। इस पद्धित से लगाए गए पौधों के पेड़ बनने का सक्सेस रेट 98 प्रतिशत रहता है। एक साल बाद इन पौधों की लम्बाई 12-15 फीट होगी। दो साल बाद 25 से 30 फीट और तीन साल बाद 35-40 फीट के बीच इनकी लंबाई होगी। 20 लाख पौधे प्लांट किए, सक्सेस रेट 95 प्रतिशत से ज्यादा
डॉ. आरके नायर के अनुसार- इस घने जंगल की खासियत रहेगी कि यहां का तापमान शहर से करीब 10 डिग्री सेल्सियस कम रहेगा। ऑक्सीजन लेवल यहां हाई रहेगा। बरसात करवाने में भी यह घना जंगल मदद करेगा। उन्होंने बताया कि उनके एनजीओ ने अभी तक देश भर में 100 ज्यादा घने जंगल विकसित किए है और 20 लाख पौधे प्लांट करने का काम कर चुका है और उन पौधों के पेड़ बनने का सक्सेस रेट 95 प्रतिशत से ज्यादा रहा है।