राजस्थान में 15 हजार से ज्यादा ड्राइवर कमजोर नजर के बावजूद हाईवे पर ट्रक दौड़ा रहे हैं। कुछ ऐसे ड्राइवर भी हैं, जिनको 5-6 फीट के बाद दिखना ही बंद हो जाता है। कई ड्राइवर की नजर इतनी कमजोर मिली कि उन्हें -6 नंबर का चश्मा पहनाने के बाद भी धुंधला दिखाई देता है। खिड़की से बाहर खड़ा व्यक्ति तक को नहीं देख पाते। स्वास्थ्य विभाग की 64 हजार से ज्यादा ट्रक ड्राइवर्स की आंखों की जांच में यह सच्चाई सामने आई है। एक्सपर्ट का कहना है कि कमजोर नजर के साथ ड्राइविंग बेहद खतरनाक हो सकती है। इससे सड़क हादसे बढ़ सकते हैं। मंडे स्टोरी में पढ़िए ये रिपोर्ट….. हाईवे पर भारी वाहन दौड़ा रहे ड्राइवर्स की आंखों की जांच
प्रदेश में पहली बार बढ़ते सड़क हादसों के चलते स्वास्थ्य विभाग ने हाईवे पर भारी वाहन दौड़ा रहे ड्राइवर्स की आंखों की जांच का विशेष अभियान चलाया था। ये अभियान ‘मां नेत्र योजना’ के तहत चलाया गया। स्टेट और नेशनल हाईवे पर भारी वाहन चलाने वाले 64 हजार ड्राइवर्स की जांच के बाद परिणाम चौंकाने वाले हैं। 15 हजार 824 यानी करीब 25 फीसदी ड्राइवर विजन डिफेक्ट के शिकार हैं। इन ड्राइवरों की आंखों का नंबर माइनस 1 से लेकर माइनस 6 तक दर्ज किया गया है। केवल बुजुर्ग ही नहीं 30-35 साल के युवा ड्राइवरों का विजन भी काफी कमजोर पाया गया है। ये कुछ उदाहरण है… केस-1 : राम सिंह (43), जयपुर 23 साल से ड्राइविंग कर रहे राम सिंह दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर ट्रक चलाते हैं। कैंप के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी आंखों की जांच की। सामने आया कि इनकी दायीं आंख का विजन माइनस 4.5 नंबर है, जबकी बायीं आंख में चश्मे का नंबर माइनस 5 है। इसी तरह जोधपुर के किशनाराम (50) और अजमेर के नंदलाल जाट (58) ने जांच के दौरान टीमों को बताया कि उन्होंने कभी जांच नहीं करवाई। दोनों के चश्मे का नंबर माइनस 2.5 और 3.5 निकला। केस-2 : लाडू सिंह(26) अजमेर दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब्बास की आंखों की जांच की। जांच में इनकी दोनों आंखों का विजन माइनस 3.75 नंबर निकला। इसी तरह उदयपुर निवासी शंकरलाल (36) की आंखों की जांच में चश्मे का माइनस नंबर 3.5 निकला। माइनस 1 से 2.50 वाले सबसे ज्यादा : सड़क-साइनबोर्ड तक नहीं देख पाते
अभियान के दौरान 84 फीसदी ड्राइवर्स में माइनस 1 से 2.50 नंबर-करीब पाया गया। इन्हें दूर की चीजें थोड़ी धुंधली दिखती हैं। कई ड्राइवर ने जांच के दौरान बताया कि उन्हें सामने की सड़क तो दिखती है, लेकिन थोड़ी दूर लगे साइन बोर्ड पर लिखे अक्षर तब तक समझ नहीं आते, जब तक गाड़ी उनके करीब न पहुंच जाए। एक्सपर्ट व्यू : इस विजन के ड्राइवर्स का रात के समय रोशनी कम होने के कारण धुंधलापन बढ़ जाता है। सामने वाली गाड़ियों की हेडलाइट फैली हुई महसूस हो सकती है। तेज रफ्तार में अचानक आने वाले मोड़ या संकेतों को पहचानने में देरी हो सकती है। 10 फीट भी नहीं देख पाते हजारों ड्राइवर्स
जांच के दौरान करीब 9.16 फीसदी ड्राइवर्स के चश्मे का नंबर माइनस 2.75 से माइनस 4 तक पाया गया। इस नंबर पर चश्मे के बिना सुरक्षित ड्राइविंग करना खतरनाक माना जाता है। एक्सपर्ट व्यू : डॉक्टर्स के अनुसार, माइनस 2.75 से माइनस 4 विजन वालों को 10-15 फीट के बाद की हर चीजें धुंधली दिखने लगती हैं। सड़क पर चल रहे पैदल यात्री या साइकिल सवार परछाई जैसे लग सकते हैं। सड़क की बनावट, गड्ढे या दूर से आ रही गाड़ी की सही दूरी और गति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। बिना चश्मे के ड्राइवर को अपनी आंखें सिकोड़कर देखने की कोशिश करनी पड़ती है, जिससे आंखों में दर्द और भारीपन हो सकता है। सबसे खतरनाक : 100 ड्राइवर ऐसे, जिन्हें 6 नंबर चश्मे की जरूरत
कैंप में करीब 0.63 फीसदी ड्राइवर्स में माइनस 4.25 से माइनस 6.0 तक नंबर पाए गए हैं। इसमें भी 100 ड्राइवर तो ऐसे मिले हैं, जिन्हें अधिकतम नंबर माइनस 6 का चश्मा चढ़ाने की जरूरत थी। एक्सपर्ट व्यू : यह एक गंभीर स्थिति है। इतनी कमजोर नजर वाले व्यक्ति को बिना चश्मे के कुछ इंच आगे का भी साफ नहीं दिखता है। ड्राइवर को सामने वाली गाड़ी की टेल-लाइट्स तो दिखेगी, लेकिन वह केवल एक लाल रंग के धब्बे की तरह नजर आएगी। ड्राइवर को यह पता ही नहीं चलेगा कि कितनी दूरी पर कोई रुकावट है। रात के समय नाइट ब्लाइंडनेस जैसा एहसास हो सकता है, क्योंकि लाइट बहुत ज्यादा फैलती हैं और विजिबिलिटी शून्य के बराबर हो जाती है। इस स्थिति में बिना चश्मे के गाड़ी चलाना जानलेवा हो सकता है। गाड़ी का डैश बोर्ड, मैप तक दिखाई देता है धुंधला
4.61 फीसदी ड्राइवर्स में प्लस 1 से लेकर प्लस 2.50 नंबर तक का आई विजन मिला है। एक्सपर्ट के अनुसार, ऐसे ड्राइवर को दिन में ड्राइविंग के दौरान ज्यादा परेशानी नहीं होती, लेकिन गाड़ी के डैशबोर्ड के मीटर, जीपीएस या मोबाइल मैप देखने में धुंधलापन महसूस होता है। 200 से ज्यादा ड्राइवर्स ऐसे मिले हैं, जिनकी आंखों में चश्मे का नंबर प्लस 2.75 से लेकर 4.0 तक मिला है। एक्सपर्ट के अनुसार, दूर का देखने मे परेशानी नहीं है। लेकिन हाईवे पर जब साइन बोर्ड तेजी से पास आते हैं, तो आंखें इतना जल्दी फोकस नहीं बदल पाती हैं। ऐसे में बोर्ड पर लिखे अक्षर धुंधले हो सकते हैं। रात में आंखों पर फोकस करने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे दूर की चीजें भी धुंधली दिखने लगती हैं। सामने से आने वाली गाड़ियों की हेडलाइट ज्यादा फैलती हुई और चुभती हुई महसूस होती है। एक्सपर्ट व्यू : नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि हाईवे पर डिस्टेंस का जजमेंट करना काफी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए ड्राइवर का विजन सही हो ये बहुत जरूरी है। अगर ड्राइवर की नजर कमजोर है, तो वह सड़क पर काफी खतरनाक हो सकता है। ड्राइवर को कोई भी वाहन या वस्तु देर से दिखेगी, तो वह ब्रेक भी देर से लगाएगा। रात के समय दूर से आ रहे वाहन की दूरी का सही अंदाजा न लगा पाना बड़े हादसों का कारण बनता है। इसके अलावा हाईवे पर मुड़ने या गति सीमा के निर्देशों को न देख पाने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। सबसे ज्यादा नेशनल हाईवे पर चल रहे कमजोर आंख वाले ड्राइवर
दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे स्थित मनोहरपुर-शाहपुरा स्थित सेंटर पर सबसे ज्यादा 21 हजार ट्रक ड्राइवर्स की आंखों की जांच हुई। यहां 9 हजार से ज्यादा ड्राइवर्स की आंखों की नजर कमजोर पाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने बांटे चश्में
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ‘मां नेत्र योजना’ के तहत आंखों की जांच कर इन ड्राइवर्स को चश्मे वितरित किए गए हैं। इसके तहत चार एजेंसियों के जरिए प्रदेश में 65 डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि पिछले साल अप्रैल से लेकर अब तक स्क्रीनिंग की गई और इस योजना में लाभार्थियों को चश्मे वितरित किए गए हैं। राजस्थान सरकार ने मां वाउचर योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री नेत्र वाउचर योजना शुरू की है। इस योजना के तहत बस और ट्रक ड्राइवर, नाई, दर्जी, बढ़ई, हस्तशिल्प और कारीगरों को मुफ्त चश्मे दिए जा रहे हैं।
