सीकर जिले की दांतारामगढ़ तहसील में बाय गांव के संत खड़ेश्वर बाबा (75) पिछले 22 साल से खड़े हैं। संत शंकर दास महाराज अब बाय गांव से करीब 850 किलोमीटर कनक दंडवत (जमीन पर लेटते हुए) करते हुए वैष्णो देवी के लिए रवाना हुए हैं। निर्जला एकादशी पर 25 जून को खड़ेश्वर बाबा ने यह यात्रा शुरू की। बाबा के साथ कुछ ग्रामीण भी चल रहे हैं। वे बाबा के लिए सड़क पर गद्दे रखते जा रहे हैं। इन पर लेटकर संत खड़ेश्वर बाबा आगे बढ़ रहे हैं। खड़ेश्वर बाबा की इस कठिन साधना और इच्छाशक्ति को लोग अचरज से देख रहे हैं। खड़ेश्वर बाबा ने इस दंडवत यात्रा पर निकलने से पहले बाय गांव स्थित आश्रम में मां दुर्गा की आराधना और अनुष्ठान किया। बता दें कि 22 साल से खड़े रहकर जीवन बिता रहे संत शंकर दास महाराज को लोग खड़ेश्वर बाबा के नाम से जानते हैं। सोते समय भी वे विशेष सहारे के जरिए खड़े-खड़े ही आराम करते हैं। नारियल लेकर हुए रवाना, वैष्णो मां को करेंगे अर्पित खड़ेश्वर बाबा अपने साथ लाल कपड़े में बंधा हुआ एक नारियल लेकर निकले हैं। वे दंडवत करते हुए नारियल को ले जा रहे हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे इस नारियल को कटरा स्थित वैष्णो माता के मुख्य मंदिर में अर्पित करेंगे। खड़ेश्वर बाबा ने बताया- इस यात्रा को पूरा करने की कोई तय समय सीमा नहीं है। पूरी यात्रा में सनातन का प्रचार करते हुए और भजन करते हुए रास्ते में आने वाले मंदिरों के दर्शन करेंगे। खाटूश्यामजी के दर्शन कर रास्ते के मंदिरों में करेंगे पूजा खड़ेश्वर बाबा की यह कनक दंडवत यात्रा खाटूश्यामजी कस्बे से होकर गुजरेगी। खाटू मंदिर में दर्शन के बाद बाबा आगे के सफर पर निकलेंगे। बाबा राजस्थान से हरियाणा और फिर पंजाब होते हुए जम्मू-कश्मीर की सीमा में प्रवेश करेंगे। इस दौरान रास्ते में आने वाले सभी प्रमुख सिद्धपीठों और मंदिरों में बाबा दर्शन-पूजन करेंगे। इसके अलावा भजन संध्याओं के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म के प्रति जागरूक करेंगे। गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग संत शंकर दास महाराज उर्फ खड़ेश्वर बाबा ने बताया- मानव कल्याण और विश्व शांति के उद्देश्य से ये यात्रा कर रहा हूं। इस यात्रा के साथ खड़ेश्वर बाबा ने गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलने की मांग करते हुए सनातन धर्म का जनजागरण और विश्व कल्याण का संकल्प लिया है। 22 साल से कर रहे अनोखी तपस्या बाबा की उम्र करीब 75 वर्ष है। बाबा करीब 22 वर्षों से अनोखी और दुर्लभ तपस्या कर रहे हैं। इन 22 सालों में बाबा कभी बैठे या लेटे नहीं। वे 24 घंटे लगातार खड़े रहकर ही साधना, पूजा-पाठ और दैनिक दिनचर्या पूरी करते हैं। निरंतर खड़े रहने के इसी कठोर संकल्प के कारण श्रद्धालुओं ने उन्हें ‘खड़ेश्वर बाबा’ का नाम दिया है।