शहर के एक कपड़ा व्यापारी की हार्ट अटैक के इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद शनिवार को निजी हॉस्पिटल में जमकर हंगामा हो गया। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामला इतना बढ़ गया कि हॉस्पिटल प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बातचीत चली। आखिरकार आपसी सहमति से 10 लाख रुपए के मुआवजे पर समझौता हो गया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। सीने में दर्द के बाद अस्पताल पहुंचे थे व्यापारी चंदनपुरा निवासी 55 वर्षीय राजेश पुत्र भंवरलाल सुराणा को शुक्रवार रात करीब आठ बजे अचानक सीने और कंधे में तेज दर्द हुआ। परिवार के लोगों के अनुसार उनका हाथ भी ठीक से नहीं उठ रहा था। पत्नी रेणु सुराणा ने इसकी जानकारी अपने रिश्तेदारों को दी। शनिवार सुबह उन्हें सांवरिया पारस मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल ले जाया गया। यहां डॉक्टर अनुराग जैन ने ईसीजी, इको और ब्लड जांच करवाई। जांच में हार्ट अटैक की पुष्टि होने के बाद एंजियोग्राफी की गई। डॉक्टर ने बताया कि हार्ट की मुख्य नस पूरी तरह ब्लॉक है और तुरंत एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डालना जरूरी है। परिजनों का आरोप, ऑपरेशन के लिए बनाया दबाव मृतक के रिश्तेदार संजय जैन ने आरोप लगाया कि एंजियोग्राफी के बाद डॉक्टर ने उन्हें सिर्फ 10 मिनट का समय दिया और कहा कि तुरंत फैसला लेना होगा। उन्होंने बताया कि परिवार के बाकी सदस्य रास्ते में थे और वे उनके आने का इंतजार करना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि इतना समय नहीं है। इसके बाद परिवार की सहमति से ऑपरेशन कराया गया। संजय जैन का आरोप है कि स्टेंट डालने के बाद डॉक्टर ने खुद बताया कि पास की एक नस डैमेज हो गई है। उनका कहना है कि इसी वजह से ज्यादा ब्लीडिंग हुई और यही मौत का सबसे बड़ा कारण बना। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर का पहले भी ऐसा रिकॉर्ड रहा है और प्रशासन से डॉक्टर की गिरफ्तारी तथा सख्त कार्रवाई की मांग की। पत्नी बोलीं- चेकअप के लिए आए थे, कुछ ही देर में ऑपरेशन करना पड़ा मृतक की पत्नी रेणु सुराणा ने बताया कि उनके पति सामान्य जांच कराने हॉस्पिटल आए थे। डॉक्टर ने पहले ईसीजी, फिर ब्लड टेस्ट और इको करवाया। इसके बाद कहा कि हार्ट में गंभीर समस्या दिखाई दे रही है और तुरंत ऑपरेशन करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग भीलवाड़ा और दूसरे शहरों से आ रहे थे, इसलिए कुछ समय मांगा गया, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि इंतजार नहीं किया जा सकता। ऑपरेशन के बाद राजेश को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। कुछ देर बाद अचानक उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। डॉक्टर उन्हें वापस ऑपरेशन थिएटर ले गए। इसके बाद परिवार को सिर्फ इतना बताया गया कि ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहा है और हालत गंभीर है। कुछ समय बाद उनकी मौत की सूचना दे दी गई। बेटी ने कहा- पहले कहा सब ठीक है, फिर अचानक हालत बिगड़ गई मृतक की बेटी अदिति ने बताया कि ऑपरेशन के बाद परिवार को लगा कि अब पिता की हालत ठीक है, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें फिर से ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। परिवार को अंदर नहीं जाने दिया गया और सिर्फ इतना बताया गया कि कुछ दिक्कत आ गई है। बाद में डॉक्टर ने पहले 50 प्रतिशत और कुछ मिनट बाद सिर्फ 5 प्रतिशत बचने की संभावना बताई। परिवार का कहना है कि पूरी स्थिति को लेकर उन्हें सही तरीके से जानकारी नहीं दी गई, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई। डॉक्टर बोले- इलाज पूरी प्रक्रिया के अनुसार किया गया डॉक्टर अनुराग जैन ने परिजनों के सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने बताया कि राजेश सुराणा हार्ट अटैक की स्थिति में हॉस्पिटल पहुंचे थे। सभी जरूरी जांच के बाद परिजनों को पूरी जानकारी दी गई और उनकी सहमति से एंजियोग्राफी की गई। जांच में मुख्य नस पूरी तरह बंद मिली, जिसके बाद एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डाला गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत सामान्य थी और उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर परिजनों से भी मिलवाया गया। करीब एक घंटे बाद मरीज को फिर से सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी हुई। ईसीजी में दोबारा हार्ट अटैक के संकेत मिले। इसके बाद दोबारा जांच के लिए ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही मरीज का हार्ट अचानक कोलैप्स हो गया। डॉक्टर ने कहा कि पूरी कोशिश के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि ऑपरेशन के दौरान कोई नस कट गई थी। हंगामे के बाद पुलिस पहुंची, 10 लाख के मुआवजे पर सुलझा मामला व्यापारी की मौत के बाद हॉस्पिटल में बड़ी संख्या में परिजन और समाज के लोग पहुंच गए। डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए हॉस्पिटल परिसर में काफी देर तक हंगामा होता रहा। स्थिति बिगड़ने पर हॉस्पिटल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दोनों पक्षों से अलग-अलग बातचीत की और मामला शांत कराने का प्रयास किया। काफी देर चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच 10 लाख रुपए के मुआवजे पर सहमति बनी। समझौते के बाद परिजन शांत हुए और हंगामा खत्म हो गया।
