राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- किसी व्यक्ति के खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने या उसे फिर से सक्रिय करने के लिए दोषसिद्धि (सजा) अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस के पास यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि कोई व्यक्ति आदतन अपराधी है तो राजस्थान पुलिस नियम-1965 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। जस्टिस रेखा बोराणा की बेंच ने स्पष्ट किया कि पुलिस नियमों में ‘आदतन अपराधी’ की परिभाषा राजस्थान आदतन अपराधी अधिनियम से अलग है। अधिनियम में तीन दोष सिद्धियों की शर्त हो सकती है, लेकिन पुलिस नियमों में ऐसी कोई शर्त नहीं है। ​सिरोही जिले से जुड़ा है मामला यह मामला सिरोही जिले के एक व्यक्ति की याचिका से संबंधित था। उसकी हिस्ट्रीशीट वर्ष 1986 में छह मामलों के आधार पर खोली गई थी। बाद में इन मामलों में समझौता होने और बरी होने के बाद हिस्ट्रीशीट को निष्क्रिय कर दिया गया था। हालांकि साल 2012 में दो नए मामले दर्ज होने पर पुलिस ने इसे फिर से सक्रिय कर दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि उसे पुराने मामलों में राहत मिल चुकी है और लगातार पुलिस निगरानी तथा बंधपत्र की कार्रवाई से उसे मानसिक परेशानी हो रही है। वहीं, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे व्यक्तियों की निगरानी आवश्यक है। हाईकोर्ट ने पुलिस की हिस्ट्रीशीट सक्रिय करने की कार्रवाई को वैध माना। हालांकि कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि वर्ष 2019 के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई नया मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में कोर्ट ने सिरोही पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे मामले की दोबारा समीक्षा करें और हिस्ट्रीशीट को जारी रखने या बंद करने पर उचित निर्णय लें।