नमस्कार सांसद महोदय ने अपने कार्यकर्ताओं को कुशल राजनीति के महत्वपूर्ण ‘टिप्स’ दिए। बाड़मेर में कलेक्टर साहिबा पर ‘वार-फेर’ कर नोट कलाकार को दिया गया। नौतपा में कोटा के जलसेवक के क्या कहने। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. ‘वोट हमें दो, काम कराओ BJP से’ नागौर वाले सांसदजी धरना किंग हो चुके हैं। जहां कहीं धरना-प्रदर्शन चलता है वहां वे पहुंच जाते हैं और सीधे कूच वाली धमकी दे डालते हैं। वे जयपुर के दूदू में संतों के आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे थे। साथ ही उन्हें यकीन दिला रहे थे कि ‘हनुमान’ आपके साथ है। इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की बड़ी चर्चा रही। इसका असर लगता है सांसद महोदय पर भी गहराई से हुआ। वे एक कदम आगे बढ़े। उनके दिमाग में ‘दीमक’ वाली बात आई। उन्होंने कार्यकर्ताओं से दीमक बन जाने की अपील की। कहा- कांग्रेस वालों को पागल बनाओ और बीजेपी वालों को धोखा दो। उनके अंदर घुस जाओ। उन्हें खोखला कर दो। उन्हें अंदर ही अंदर खत्म कर दो। बोलो करोगे? कार्यकर्ताओं को यह सुझाव पसंद आया। बोले- करेंगे। कार्यक्रम में किसी ने ट्रांसफर कराने की बात कह दी। सांसदजी ने उसे भी लपेट लिया। बोले- बंडल लेकर घूमते हो। ट्रांसफर करा दो, ये करा दो, वो करा दो, ये काम अपना है क्या? काम कराओ बीजेपी वालों से और वोट दो आरएलपी को। कार्यकर्ताओं को ये सुझाव भी पसंद आया और सभागार तालियों से गूंज उठा। 2. कलेक्टर चिन्मयी गोपाल पर ‘वार-फेर’ पूर्व कलेक्टर साहिबा ने नवो बाड़मेर अभियान चलाया था। बाड़मेर के कारण वे और उनके कारण बाड़मेर सुर्खियों में रहने लगा। कायाकल्प होने लगा। कलेक्टर साहिबा जो भी करतीं उनके फैन्स सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाते थे। फिर मैडम का तबादला हो गया। नई कलेक्टर मैडम ने चार्ज संभाला। प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों से घिरी रामसर पहुंचीं। वहां मैडम के स्वागत के लिए लोक कलाकारों में बरामदे में वाद्य यंत्रों के साथ बैठाया गया था। मैडम के आगमन की सुगबुगाहट पाकर कलाकारों ने गायन-वादन शुरू कर दिया। मैडम उन्हें नजरअंदाज करके नहीं निकल सकीं। वहां रुकीं और लोक कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए भेंट देनी चाहिए। मैडम ने सचिवजी को इशारा किया। इस बीच वहां खड़े अन्य लोग उतावले हो गए। सचिवजी की जेब से नोट निकलने से पहले ही उत्साही सज्जन ने नोट निकाला और कलेक्टर साहिबा के सिर पर दो बार घुमाकर लोक कलाकार को थमा दिया। तीसरे सज्जन तो जेब टटोलते ही रह गए। वे यह दिखाना चाहते थे कि मैं भी देने के मामले में कहीं पीछे नहीं। 3. चलते-चलते.. आसमान से आग बरस रही है। सूर्यदेव का तेज अग्नि परीक्षा ले रहा है। एक समय था जब सभी लोग पैदल चलते थे। पैसे वालों के पास साइकिल होती थी। उस दौर में भी नौतपा कहर बरपाता ही था। ऐसे में ठंडी प्याऊ का बड़ा महत्व था। प्याऊ के अंदर बड़े-बड़े घड़े टाट की चादर लपेटकर रखे जाते। एक जरा सी मोखी (खिड़की) में ठंडे पानी से भरा रामझारा रखकर प्याऊ का सेवादार लोगों को पानी पिलाता। इस सेवा को धर्म से जोड़ा जाता। पीने वाला आशीर्वाद सा देता। हैसियत के हिसाब से चवन्नी-अठन्नी भी मोखी में बढ़ा देता। पानी पीते वक्त जो बूंदें नीचे छोटे जलकुंड की तरह जमा होतीं उसने कई पक्षी भी मौका पाकर प्यास बुझाते। पानी अब बोतलों में बिकता है। प्याऊ का अस्तित्व लगभग मिट गया। वॉटर कूलर खड़े हो गए। जो न मनुहार करते हैं और न धर्म-कर्म समझते हैं। कोटा के रामगंजमंडी में कुछ युवा अच्छा काम कर रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर वे ठंडा पानी लेकर पहुंचते हैं और चंद सेकेंड या मिनट के ठहराव के बीच लोगों को पानी पिलाते हैं। उनकी बोतलें भरते हैं। सेवा धर्म का तरीका बदल सकता है। लेकिन भाव बना रहना चाहिए। इसी भाव पर धरती टिकी है। इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।