उदयपुर के सज्जनगढ़ अभयारण्य स्थित मानसून पैलेस देखने के खराब रास्ते के कारण पर्यटक परेशान हो रहे हैं। नीचे से लेकर टॉप तक पहुंचने से पहले जगह-जगह से सड़क टूट गई है। दोपहिया सवार कई बार गिरकर घायल हो गए हैं। वहीं कारें भी खराब हो जाती हैं। इसके बावजूद वन विभाग पर्यटकों की परेशानी पर ध्यान नहीं दे रहा। टूरिस्ट और उदयपुर के लोग यहां भारी भरकम टिकट देकर जाते हैं, लेकिन ऊंचाई तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पर्यटकों ने कहा- अच्छा रेवेन्यू होने के बाद भी वन विभाग इस सड़क की सुध नहीं ले रहा। पहले देखें अभयारण्य की सड़कों का हाल चट्टानों से सड़क पर गिर रहे पत्थर सज्जनगढ़ की टॉप पर पहुंचने से करीब आधा किलोमीटर नीचे सड़क का किनारा पूरी तरह से टूट गया। चट्टानों से पत्थर और मलबा सड़क पर गिर रहा है। वहां से दो-चार पहिया वाहन एक साथ नहीं निकल सकते हैं। ऐसे में वहां शाम को जैसे ही टूरिस्ट निकलते हैं, उस समय और खास कर संडे को जाम लग जाता है। शाम को मानसून पैलेस जाने वाले यात्रियों को जाम के चलते वापस जल्दी आना पड़ता है, क्योंकि जाम से वे समय पर पैलेस नहीं पहुंच पाते हैं। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष और पूर्व पार्षद शंकर चंदेल ने बताया- वन विभाग करोड़ों रुपए यहां से कमाता है। उसमें से कुछ पैसा खर्च कर सड़क को रिपेयर नहीं कर रहा है। चंदेल ने बताया- टिकट लेकर लोगों और टूरिस्ट के हाथ-पैर इस सड़क से टूट रहे हैं और वन विभाग में कोई देखने वाला नहीं है। स्टूटी गिरने से घायल हो गए थे यात्री पिछले महीने यहां कई हादसे हुए। इसकी जानकारी वन विभाग के फील्ड स्टाफ को है, लेकिन लगता है कि चैंबर में बैठे अफसरों को कोई लेना-देना नहीं है। सड़क के मेंटनेंस करने का काम इतना समय निकल जाने के बाद भी नहीं कराया गया। पिछले दिनों गुजरात से आए एक टूरिस्ट की किराए की स्कूटी गिर गई तो उनके पैर में लगी थी। इधर, दो स्कूटी सवार भी गिर गए और उनकी स्कूटी के आगे का पूरा भाग डेमेज हो गया। ऐसे कई घटनाएं हो चुकी हैं और लगातार हो रही हैं। विभाग के अफसर बोले- सड़क बनाने का दिया नया टेंडर क्षेत्रीय वन अधिकारी सीताराम मीणा कहते हैं कि इस सड़क का विभाग ने टेंडर कर दिया था, लेकिन ठेकेदार के काम शुरू नहीं करने पर उसे डिबार कर दिया था। अब नया टेंडर जारी किया और उसका वर्कऑर्डर भी दे दिया। जल्द काम शुरू हो जाएगा। दिसंबर में पर्यटकों से वन विभाग ने कमाए 1.49 करोड़ रुपए दिसंबर 2024 में मानसून पैलेस में 71 हजार 354 पर्यटक आए। भारी भीड़ से सरकारी खजाने में 1.49 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। विशेष रूप से नए साल के जश्न के दौरान, व्यस्त दिनों में प्रतिदिन 5,000 तक पर्यटक इस स्थल पर आते हैं। दीपावली के अवकाश के दौरान यहां सबसे ज्यादा टूरिस्ट रहते हैं। सूर्यास्त के समय मनमोहक दृश्य मानसून पैलेस शाम के समय विशेष रूप से लोकप्रिय होता है। यहां के सूर्यास्त के दृश्य मनमोहक होते हैं, जो इस पल को कैमरे में कैद करने के लिए उमड़ती भीड़ को आकर्षित करते हैं। पर्यटक अक्सर झीलों और घाटियों की पृष्ठभूमि में तस्वीरें लेते हैं। अपने फोन पर वीडियो बनाते हैं। मानसून के दौरान आसपास की हरियाली और बादल महल की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। इससे आगंतुकों को ऐसा महसूस होता है कि मानो वे बादलों के बीच हों। ये है एंट्री फीस 3100 फीट ऊंचाई पर है सज्जनगढ़ सज्जनगढ़ समुद्री तल से 3100 फीट ऊंचाई पर है। यह सबसे ऊंची पहाड़ी की चोटी पर बनाया गया है। करीब 132 साल पहले मेवाड़ के राजा सज्जन सिंह ने खास तौर पर मानसून के बादलों को देखने और बारिश का अनुमान लगाने के लिए बनवाया था। इसका नाम मानसून पैलेस रखा गया। इसी महल को यहां देखने टूरिस्ट आते हैं। इसके टॉप से फ्रंट की तरफ फतहसागर झील और उदयपुर शहर दिखता है। राइट साइड में पिछोला झील का नजारा दिखता है। पीछे की तरफ बड़ी तालाब और उदयपुर की पहाड़ियों से प्रकृति का नजारा दिखता है।
