गीता भवन, हरपाल नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिवस का आयोजन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी सुरेश मुनि महाराज जी की पावन अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। 51वीं गीता जयंती के अवसर पर आयोजित इस कथा का शुभारंभ स्वामी श्री नरोत्मानन्द जी, हरिद्वार द्वारा जोती और झंडा समारोह के माध्यम से किया गया। इस दौरान ज्योति प्रज्जवलित की रस्म बठिंडा नगर निगम मेयर पदमजीत मेहता, नरेश कुमार निट्टू, भरत गिलास, विनोद कुमार बोधा और चौरंगी लाल गर्ग तथा झंडा रस्म डीपी गोयल और कमल कुमार ने गीता भवन प्रधान ओम प्रकाश मित्तल और संदीप कुमार (हैप्पी) की उपस्थिति में किया गया। कथा व्यास पीठ पंडित अश्वनी शास्त्री, कालांवाली ने भगवान श्री कृष्ण के विविध लीलाओं का मनमोहक वर्णन किया। उन्होंने मां देवकी के कहने पर 6 पुत्रों को वापस लाने की कथा, सुभद्रा हरण का आख्यान और सुदामा चरित्र का मार्मिक विवरण प्रस्तुत किया। कथा व्यास पीठाधीश्वर पुष्पा बहन जोशी ने सुदामा और कृष्ण की मित्रता का विवरण देते हुए बताया कि सुदामा द्वारिका पहुंचे और द्वारपालों के संदेह के बावजूद कृष्ण से अपनी मित्रता की पहचान कराई। कृष्ण ने सुदामा को अपने सीने से लगाकर राजसिंहासन पर बिठाया और उन्हें कुबेर का धन देकर सम्मानित किया। कथा में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भगवान की लीलाओं और मित्रता के आदर्श का लाभ उठाया। कथा व्यास पीठाधीश्वर ने कहा कि जो कोई भागवत कथा का श्रवण करता है, उसका जीवन तारित होता है। इस अवसर पर स्वामी नरोत्मानन्द जी, ओम प्रकाश मित्तल, संदीप कुमार (हैप्पी), अशोक कुमार गोयल, सतीश गर्ग, सतपाल गोयल, संदीप गर्ग (हैप्पी), कुंज बिहारी, तारा चंद, सुदामा, गीतेश और आशुतोष सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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