पंजाब के लुधियाना में उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने KFC आउटलेट को फूड प्वाइजनिंग के मामले में दोषी ठहराया है। आयोग ने आउटलेट को 25,000 रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। कमीशन के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि भोजन का सेवन शिकायतकर्ता की तबीयत खराब होने का कारण नहीं था। आयोग ने स्पष्ट किया कि हानिकारक खाद्य पदार्थ बेचने के मामले में उत्पाद दायित्व (Product Liability) बनता है और शिकायत पूरी तरह से सही है। 256 रुपए का खाना पड़ा भारी
शिकायतकर्ता अमरजोत सिंह निवासी न्यू जनता नगर ने बताया कि 11 नवंबर 2023 को उसने KFC JMD Govardhan City Centre से 256 रुपए में हॉट विंग्स, कोल्ड ड्रिंक और फ्राइज खरीदे थे। आउटलेट के स्टाफ ने खाना ताजा होने का दावा किया, लेकिन खाने के 30 मिनट के अंदर ही उसे पेट दर्द, उल्टियां, कमजोरी और मानसिक तनाव जैसी दिक्कतें होने लगीं। एक हफ्ते तक रहा बीमार
पीड़ित ने तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाया, जहां फूड प्वाइजनिंग के लक्षण पाए गए। दवाइयां और इंजेक्शन दिए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह करीब एक हफ्ते तक बिस्तर पर रहा, जिससे उसे व्यापारिक नुकसान और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। नोटिस के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अमरजोत सिंह ने कंपनी को लीगल नोटिस भी भेजा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया। मामले में Sapphire Foods India Ltd. और KFC Pvt. Ltd. ने शिकायत का विरोध किया। कंपनी ने कहा कि उस दिन 200 से ज्यादा फूड आइटम बेचे गए थे और किसी अन्य ने शिकायत नहीं की। साथ ही लैब रिपोर्ट न होने का भी हवाला दिया। हालांकि आयोग ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि खाद्य पदार्थ “गुड्स” की श्रेणी में आते हैं और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद का अधिकार है। 30 दिन में देना होगा मुआवजा
कमीशन ने आदेश दिया कि 30 दिनों के भीतर 25,000 रुपए का मुआवजा दिया जाए। तय समय में भुगतान न करने पर 8% सालाना ब्याज भी देना होगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकार और फूड सेफ्टी को लेकर एक अहम मिसाल माना जा रहा है।
