मोगा के गांव भलूर में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम से ठीक पहले उस समय राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई, जब पुलिस ने कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ रहे यूथ अकाली दल के जिला प्रधान हरजोत सिंह डेमरू और उनके दर्जनों समर्थकों को हिरासत में ले लिया। इस पुलिसिया कार्रवाई से भड़के शिरोमणि अकाली दल के आला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने समालसर थाने के घेराव कर बाहर पक्का धरना लगा दिया और पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने बताया कि वे कोई हंगामा करने नहीं, बल्कि भलूर माइनर (नहर) और उसकी टेलों (अंतिम छोर) तक नहरी पानी न पहुंचने की गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से शांतिपूर्ण ढंग से सवाल करने जा रहे थे। अकाली दल ने आरोप लगाया कि ‘लोक मिलनी’ के नाम पर ढोंग कर रही आम आदमी पार्टी की सरकार जनता और विपक्ष की आवाज सुनने के बजाय पुलिस के दम पर उन्हें रास्ते में ही रोककर समालसर थाने में बंद कर रही है। किसान नेताओं और मीटर रीडरों को भी पुलिस ने दबोचा अकाली दल के साथ-साथ किसान संगठनों के नेताओं और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने आ रहे मीटर रीडरों को भी पुलिस ने मुख्यमंत्री से मिलने से पहले ही हिरासत में ले लिया। इस एकतरफा पुलिसिया कार्रवाई से नाराज किसान नेताओं और मीटर रीडरों ने भी एकजुट होकर पंजाब सरकार और मोगा पुलिस के खिलाफ कड़ा रोष प्रदर्शन किया। रिहाई तक धरना जारी रखने की चेतावनी थाने के बाहर डटे दिग्गज नेता शिरोमणि अकाली दल के कोर कमेटी सदस्य जत्थेदार तीर्थ सिंह माहला, जिला प्रधान निहाल सिंह भुल्लर और शहरी प्रधान खेम मुख्य भारती पत्तो के नेतृत्व में सैकड़ों अकाली कार्यकर्ता समालसर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। माहला ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले भगवंत मान कहते थे कि जनता नेताओं से सवाल पूछे, लेकिन आज जब जनता और विपक्ष सवाल पूछने आ रहा है, तो मुख्यमंत्री महोदय मुंह छुपा रहे हैं।” उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि जब तक हिरासत में लिए गए उनके सभी साथियों को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, तब तक थाने के आगे उनका यह धरना दिन-रात जारी रहेगा। लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन: अकाली दल इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक माहौल बेहद गरमा गया है। शिरोमणि अकाली दल ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन और जनता की जायज आवाज को दबाने का प्रयास करार दिया है। हालांकि, इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम और गिरफ्तारियों को लेकर मोगा पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।