जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ तहसील में छतागढ़ गांव में पिछले कई दिनों से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। गांव की मुख्य बिजली लाइन की केबल खराब होने के कारण करीब 300 परिवार इस भीषण गर्मी में अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया- सबसे बदतर स्थिति पेयजल की है। नलकूप बंद होने से गांव में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पशुपालन पर निर्भर इस क्षेत्र में पानी की किल्लत के कारण गौवंश दम तोड़ रहा है। डिस्कॉम (बिजली निगम) की इस घोर लापरवाही से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। 45 डिग्री तापमान में पानी को तरसे ग्रामीण ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे पत्र में बताया कि वर्तमान में जैसलमेर क्षेत्र का तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच रहा है। ऐसे में बिजली गुल होने से घरों में लगे पंखे, कूलर और पानी की मोटरें शोपीस बनकर रह गई हैं। सबसे बदतर स्थिति पेयजल की है। नलकूप बंद होने से गांव में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पशुपालन पर निर्भर इस क्षेत्र में पानी की किल्लत के कारण गौवंश दम तोड़ रहा है। अधिकारी नहीं दे रहे कोई संतोषजनक जवाब ग्रामीणों का कहना है कि लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब पिछले दिनों डिस्कॉम अधिकारियों ने ‘शुक्रवार को लाइट ठीक करने’ का दावा दे दिया, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और पूरा गांव आज भी अंधेरे में डूबा है। अधिकारी सिर्फ कागजों में लाइट ठीक कर रहे हैं-ग्रामीण छतागढ़ के ग्रामीण शम्भू सिंह ने बताया- “गांव की केबल पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। अधिकारी एयरकंडीशनर कमरों में बैठकर समाचार पत्रों में तो बयान दे देते हैं कि शुक्रवार को लाइट ठीक कर दी गई है, लेकिन धरातल पर आकर देखें तो आज भी पूरा गांव अंधेरे में है। अधिकारी हमारा फोन तक नहीं उठा रहे हैं। अगर हमारी समस्या का तुरंत स्थायी समाधान नहीं हुआ और नई केबल नहीं डाली गई, तो हम सभी ग्रामीण कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।” कलेक्टर से की तुरंत कार्रवाई की मांग समस्त ग्रामीणों की ओर से भेजे गए इस पत्र में जिला कलेक्टर से मांग की गई है कि छतागढ़ गांव की जर्जर केबल को तत्काल बदलकर नई केबल डाली जाए और गांव में नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रामक जानकारी देने वाले संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही की जांच कर उन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।