पंजाब कानूनी सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग की अध्यक्षता में शनिवार को पठानकोट कोर्ट कॉम्प्लेक्स में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस अदालत में आपसी सहमति से हजारों विवादों का समाधान किया गया, जिससे कई परिवारों में खुशियां लौट आईं। इस दौरान कुल 7 बेंच लगाए गए थे, जिनमें न्यायिक अधिकारियों ने मामलों की सुनवाई की। 10,345 मामलों का निपटारा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि इस लोक अदालत में कुल 11,198 मामले रखे गए थे। जिनमें से 10,345 मामलों का निपटारा किया गया। वहीं, इस दौरान कुल 5.82 करोड़ से अधिक के अवार्ड पास किए गए।
तीन परिवारों का घर फिर से बसा
इस लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि पारिवारिक विवादों का निपटारा रही। सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग के विशेष प्रयासों और फैमिली कोर्ट की जज जसबीर कौर की अदालत में 3 बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाया गया। मिसाल को तौर पर प्रीतम चंद बनाम सोनिया के मामले में दंपति के तीन बच्चे थे और वे लंबे समय से अलग रह रहे थे, जज के समझाने पर दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। इससे बच्चों को फिर से माता-पिता का प्यार और एक पूर्ण परिवार मिल सका। बैंक और वित्तीय विवादों का समाधान
अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश एकता उप्पल की अदालत में घियाला निवासी एक व्यक्ति और बैंक के बीच 42,681 रुपए और ब्याज से जुड़ा मामला सुलझाया गया। न्यायाधीश के प्रयासों से व्यक्ति राशि चुकाने को तैयार हो गया और दोनों पक्षों के बीच विवाद समाप्त हो गया। न किसी की हार, न किसी की जीत: सेशन जज
सत्र न्यायाधीश रजनीश गर्ग ने आम जनता को संबोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत में किसी भी पक्ष की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष जीतकर जाते हैं। यहां होने वाला फैसला अंतिम होता है और इसके खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती। इसके अलावा, लोक अदालत में केस सुलझने पर कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि समय और धन की बचत के लिए वे अपने विवादों को अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालत के माध्यम से सुलझाएं।