वैशाख शुक्ल पक्ष षष्ठी के पावन अवसर पर जसोलधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह मंगला आरती के साथ ही दर्शनार्थियों का आगमन शुरू हो गया, जो दिन चढ़ने के साथ जनसैलाब में बदल गया। मंदिर परिसर ‘जय मां जसोल’ के जयघोषों से गूंजता रहा। मंदिर संस्थान की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। दर्शन के लिए कतारबद्ध व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। इन व्यवस्थाओं के चलते हजारों श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। मंदिर कर्मचारियों ने पूरे दिन सेवाएं देते हुए ‘सेवा ही साधना’ की भावना को जीवंत किया। छप्पन भोग का विशेष आयोजन इस खास मौके पर छप्पन भोग का आयोजन भी किया गया। यह भोग आनंद (गुजरात) निवासी विकास माहेश्वरी, जो शिशुपाल माहेश्वरी के पुत्र हैं, द्वारा अर्पित किया गया। श्रद्धा और भक्ति से अर्पित इस भोग के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया, जिन्होंने इसे आशीर्वाद के रूप में ग्रहण किया। कन्या पूजन में दिखी नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा कार्यक्रम के दौरान कन्या पूजन का भी विशेष आयोजन किया गया। छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन, सत्कार और सम्मान किया गया। उन्हें भोजन, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित की गई। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के महत्व को उजागर किया गया। दिनभर चला आस्था और सेवा का संगम दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों और दर्शन व्यवस्था के दौरान जसोलधाम में अनुशासन, श्रद्धा और सेवा का सुंदर समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने श्री राणीसा भटियाणीसा के चरणों में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं और विशेष रूप से लाभार्थी परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी के जीवन में मंगल की कामना की।
