जैसलमेर. शहर और आसपास के इलाकों में सक्रिय स्थानीय नेटवर्क सार्वजनिक भूमि की पहचान से लेकर कब्जा टिकाने तक अलग-अलग चरणों में रकम तय करते हैं। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि शहरी इलाके, जमीन की संभावित कीमत, सडक़ से दूरी, भविष्य के विकास और प्रशासनिक निगरानी के आधार पर यह रकम सामान्यत: 50 हजार से 2 लाख रुपए तक पहुंच जाती है। जांच और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारियां बताती हैं कि शहर की सीमा से सटे बाहरी क्षेत्रों, नई कॉलोनियों के आसपास और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों में सरकारी जमीन सबसे अधिक निशाने पर रहती है। पहले जमीन चिन्हित होती है, फिर कब्जाधारी तैयार किए जाते हैं और बाद में उस पर निर्माण या सीमांकन कर स्थायी स्वरूप देने की कोशिश होती है।
