भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के वैज्ञानिक सूरज की रोशनी से ऊर्जा स्टोर करने वाले स्मार्ट मैटेरियल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं। IIT जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मोनिका गुप्ता के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ऐसे स्मार्ट मैटेरियल विकसित कर रही है, जो सूरज की दृश्य रोशनी (Visible Light) का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। यह शोध भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा, स्मार्ट उपकरणों और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। वर्तमान में अधिकांश ऐसे मैटेरियल केवल पराबैंगनी (UV) किरणों पर काम करते हैं, जबकि सूर्य के प्रकाश का सबसे बड़ा हिस्सा दृश्य प्रकाश होता है। इसलिए इनका वास्तविक जीवन में उपयोग सीमित रह जाता है। IIT जोधपुर के वैज्ञानिक ऐसे मैटेरियल विकसित कर रहे हैं जो सीधे दृश्य प्रकाश में काम कर सकें, जिससे उनकी उपयोगिता और दक्षता दोनों बढ़ जाएगी। विशेष ऑर्गेनिक मैटेरियल किए जा रहे तैयार यह शोध IIT जोधपुर की फंक्शनल ऑर्गेनिक मैटेरियल्स प्रयोगशाला में किया जा रहा है। वैज्ञानिक ऐसे विशेष ऑर्गेनिक मैटेरियल तैयार कर रहे हैं, जो प्राकृतिक सूर्य प्रकाश के संपर्क में आने पर अपने गुण बदल सकें तथा सौर ऊर्जा को बेहतर तरीके से संग्रहित और उपयोग कर सकें। इस शोध की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दृश्य प्रकाश से संचालित होने वाले मोलिक्यूलर फोटोस्विचेज (Molecular Photoswitches) का विकास है। ये बेहद छोटे अणु (मॉलिक्यूल) हैं, जो रोशनी मिलने पर अपनी संरचना बदल लेते हैं। पहले ऐसे मॉलिक्यूल केवल UV प्रकाश में ही सक्रिय होते थे, लेकिन IIT जोधपुर के वैज्ञानिक इन्हें इस तरह विकसित कर रहे हैं कि ये सामान्य सूर्य की रोशनी में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें। इससे ये अधिक टिकाऊ और व्यावहारिक बनेंगे। प्रकाश से संचालित मशीनों में हो सकेगा उपयोग
रिसर्चर इन मॉलिक्यूल्स को लिक्विड क्रिस्टल मैटेरियल्स के साथ भी जोड़ रहे हैं। सूर्य की रोशनी पड़ने पर ये मैटेरियल अपने प्रकाशीय (Optical) और यांत्रिक (Mechanical) गुणों में बदलाव लाते हैं। भविष्य में इनका उपयोग स्मार्ट विंडो, स्वयं परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाले ऑप्टिकल उपकरण, प्रकाश से संचालित मशीनें, स्मार्ट कोटिंग, उन्नत फोटोनिक सिस्टम तथा नई पीढ़ी के ऊर्जा उपकरणों में किया जा सकता है। सूर्य ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा के रूप में सुरक्षित रखने पर शोध
शोध का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल फ्यूल्स (MOST) तकनीक है। इस तकनीक में सूर्य की ऊर्जा को सीधे उपयोग करने के बजाय उसे रासायनिक ऊर्जा के रूप में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। बाद में जब आवश्यकता हो, तब यही ऊर्जा गर्मी के रूप में प्राप्त की जा सकती है। वैज्ञानिक इस तकनीक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऐसे मैटेरियल विकसित कर रहे हैं, जो अधिक ऊर्जा संग्रहित कर सकें, लंबे समय तक उसे सुरक्षित रखें और आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित तरीके से ऊर्जा वापस दें। इतना ही नहीं, ये अत्यधिक ठंडे वातावरण में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे। इस शोध के सफल होने पर भविष्य में ऐसी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का विकास संभव होगा, जिनमें सूर्य की रोशनी उपलब्ध न होने पर भी पहले से संग्रहित ऊर्जा का उपयोग किया जा सकेगा। इससे नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के उपयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस शोध के बारे में रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मोनिका गुप्ता ने कहा- प्रकृति हमें हर दिन भरपूर सूर्य प्रकाश देती है, लेकिन आज उपलब्ध अधिकांश मैटेरियल उसका पूरा उपयोग नहीं कर पाते क्योंकि वे केवल UV प्रकाश पर निर्भर हैं। हमारा प्रयास ऐसे स्मार्ट मैटेरियल विकसित करना है, जो सीधे दृश्य प्रकाश में काम करें और वास्तविक परिस्थितियों में सौर ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संग्रहित एवं उपयोग कर सकें। भविष्य में ये तकनीक स्वच्छ ऊर्जा, स्मार्ट उपकरणों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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