राजस्थान के शिक्षा विभाग में शिक्षकों तथा स्कूलों की संख्या बढ़ने के बाद प्रत्येक सरकार के समय शिक्षकों के तबादलों की नीति बनाने की मांग तथा सरकारी स्तर पर केवल कार्रवाई होती रही है। अनेक स्तर पर कमेटियां बनीं, दिशा-निर्देश जारी हुए, लेकिन शिक्षकों की आज भी तबादला नीति नहीं बनी। इससे रसूखदार शिक्षक तो अपना काम निकाल रहे हैं, मगर सामान्य शिक्षक इनमें पिस रहा है। हैरानी इस बात की है कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक महिलाओं के हितों की बातें तो करते हैं, मगर ट्रांसफर में महिला हितों को दरकिनार किया जा रहा है। दरअसल 5 जनवरी 2024 को जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता परिवर्तन के बाद अफसरों के तबादलों को लेकर संदेश दिया था कि अधिकारी कभी किसी पार्टी के नहीं होते हैं। तबादलों में नेताओं की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। पांच साल सत्ता में रहते हुए समय का सदुपयोग करें और बेहतर काम करें। मगर राजस्थान में शिक्षक ट्रांसफर का खेल ही अलग है। यहां राजनीति और राजनीतिक विचारधारा के आधार पर ही ट्रांसफर होते रहे हैं। पिछली सरकार ने आरएसएस विचारधारा वाले शिक्षकों को जमकर प्रताड़ित किया और अब मौजूदा सरकार उसी का बदला लेने में पीछे नहीं है। बिना नीति के तबादले राजनीतिक आधार पर होते जा रहे हैं। इस राजनीति में वे महिलाएं भी पिस रही हैं, जो किसी नेता को न तो जानती हैं और न ही उनकी विचारधारा से जुड़ी हैं। संभ्रांत परिवार की महिलाएं नेताओं के चक्कर लगाने से बेहतर ट्रांसफर को स्वीकार करना जरूरी समझती हैं। मौजूदा सरकार ने हाल ही में लेक्चरर के तबादले किए, उसमें महिलाओं को उनके ससुराल और पीहर से दूर फेंक दिया। महिला शिक्षकों का कहना है कि उनके लिए तबादला नीति अलग होनी चाहिए, क्योंकि दूर-दराज जगहों पर जाने से उन्हें शोषण होने का डर है। महिला शिक्षकों ने भास्कर को सुनाई आपबीती ये दर्द है …इधर राहत 5 कारण… जिससे नहीं हो रहे थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादले इस सरकार में संघ पृष्ठभूमि की ही सुनवाई नहीं हाल ही में जारी हुई लेक्चरर ट्रांसफर सूची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़ी विचारधारा वाले शिक्षकों की ही सुनवाई नहीं हुई। भास्कर के पास पूरे प्रदेश में ऐसे एक-दो-तीन नहीं, बल्कि 40 से ज्यादा प्रमाण हैं, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दायित्ववान कार्यकर्ता हैं, मगर उनके साथ उन्हें सजा जैसा सलूक किया गया। “हालांकि ये नियम है कि जो महिला जहां तैनात है, वह उसी स्थान पर रहे, पर गांव में बच्चों को छोड़कर रहना मुश्किल होता है। पति-पत्नी को एक साथ रखने का भी प्रावधान है, मगर सरकारें मानती कहां हैं। मैं तो स्पष्ट स्थानांतरण नीति के पक्ष में हूं। सामान्य महिलाओं को भी पीहर-ससुराल के पास रखा जाए, बेहतर होगा।” -महेंद्र पांडे, महामंत्री, राप्रामाशि संघ
