धनापा ग्राम पंचायत की करीब दस हजार बीघा जमीन के मामले में एसडीएम ने कहा कि उन्होंने अपील को निरस्त किया था, न कि कोई हस्तांतरण किया, जो उनके क्षेत्राधिकार में है। यहां जमीन देश की आजादी से ही मगरा व पहाड़ में थी, जो आज भी बता रही है। लेकिन बीच में ग्राम पंचायत ने अपनी मनमर्जी से इसको गोचर में हस्तांतरित कर दिया था। लेकिन इसका रिकॉर्ड नहीं है। जब इस जमीन के नामांतरण को रद्द किया गया तो यह पुन: मगरा व पहाड़ में हस्तांतरित हुई है। ऐसे में सरकारी जमीन को बचाया गया है। जो पहले मगरा व पहाड़ में थी अब भी वो ही है। यह सब कार्य तहसीलदार की लिखित रिपोर्ट के बाद किया गया। एसडीएम पूनम चोयल के अनुसार धनापा ग्राम पंचायत में करीब 13 हजार बीघा जमीन पहाड़ी इलाका और मगरा भूमि की थी। इस जमीन को तत्कालीन सरकार ने 1974 में लीजों में आंवटित किया। सन 1987 में जे.के. व्हाइट सीमेंट कंपनी के नाम लीज आवंटित कर दिया। मगर 1978 में ग्राम पंचायत ने इस जमीन को गोचर दर्ज करा दिया था। इसको लेकर तहसीलदार ने लिखित रिपोर्ट में बताया कि गोचर होने के कोई कागज नहीं है तथा इसका कहीं रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में अपील को निरस्त करते हुए पुन: मगरा व पहाड़ के रूप में ही रखा। आदेश में स्पष्ट है कि उन्होंने जमीन का हस्तांतरण नहीं करके अपील को खारिज किया है। जो उनके क्षेत्राधिकार में है। दो सवाल: जो जांच का विषय है, इन पर कोई जवाब नहीं दे रहे
1. अगर गोचर जमीन थी तो सरकार ने वहां लीजे आवंटित कैसे कर दी।
2. अगर मगरा भूमि व पहाड़ की जमीन है तो फिर गोचर का दावा करना गलत है या एसडीएम का अपील निरस्त करने का आदेश गलत है।